पाकिस्तान की पहली हिंदू महिला न्यायाधीश बनीं सुमन कुमारी

suman kumariसुमन कुमारी मुस्लिम राष्ट्र पाकिस्तान की पहली हिंदू महिला जज नियुक्त हुईं । वहां के मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ न्यायाधीश सुमन कुमारी सिंध प्रांत के कंबर-शहदादकोट की रहनेवाली हैं। वहीं की एक अदालत में न्यायाधीश का पदभार संभालेंगी सुमन । वर्तमान पाकिस्तान की आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी तकरीबन 2 प्रतिशत है हालांकि  हिंदू धर्मावलंबी ही मुस्लिम बहुल पाकिस्तान का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है । लिहाज़ा मौजूदा हालात में इस घटना को काफ़ी अहम माना जा रहा है।
सुमन के पिता पवन कुमार बोदन पेशे से एक नेत्र-चिकित्सक हैं और गरीब गांववालों का मुफ़्त इलाज करते हैं। कम आय के बावजूद उन्होंने अपनी तीनों बेटियों को उच्च शिक्षा दिलायी।उनकी बड़ी बेटी साफ़्टवेयर इंजीनियर ,दूसरी बेटी चार्टर्ड अकाउंटेंट और सुमन एक जज …। हैदराबाद (सिंध) से एल एल बी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सुमन ने कराची के शहीद ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो इंस्टिट्यूशन से स्नातकोत्तर किया। परिवार की मामूली आमदनी हो या रूढ़िवादी समाज-कुछ भी उनके उत्थान में बाधा न बना। बेटी की सफलता पर उनके पिता काफी ख़ुश नज़र आए। पाकिस्तानी मीडिया के सम्मुख अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि-” सुमन ने एक चुनौतीपूर्ण पेशे का चुनाव किया है। लेकिन मुझे दृढ़ विश्वास है कि कड़ी मेहनत और ईमानदारी से वह ज़रूर अपने मुकाम तक पहुंचेगी।”
पाकिस्तान जैसे देश में जहां से आए दिन अल्पसंख्यकों पर ज़ुल्मो-सितम की ख़बरें आती रहती हैं, वहां इस तरह की घटना वाक़ई अहमियत रखती है।
बहरहाल ऐसा नहीं है कि  पहली बार न्यायाधीश के पद पर किसी हिंदू की नियुक्ति हुई हो, इससे पहले 2005 से 2007 तक राणा भगवान दास ने पाकिस्तान के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभाला था।
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भारत में नशीले पदार्थों का कारोबार कर रहे हैं रोहिंग्या मुस्लिम घुसपैठिये !

rohingyaम्यांमार से भागकर आए लाखों रोहिंग्या मुस्लिमों ने बांग्लादेश में पनाह ली। मानवता का कारण दिखाकर बांग्लादेश सरकार ने उन्हें हर तरह की सहूलियतें मुहैया कराईं। लेकिन ये रोहिंग्या बांग्लादेश में आते ही नशीले पदार्थों की तस्करी, हत्या, चोरी आदि आपराधिक गतिविधियों में लिप्त होने लगे। मुख्यतया उन्हीं के जरिए बांग्लादेश में  प्रतिबंधित नशीली दवा ‘इयोबा’ का कारोबार फलने फूलने लगा।
बहरहाल सीमा पर कड़ी निगरानी व चौकसी के बावजूद ये रोहिंग्या मुस्लिम बड़ी संख्या में भारत में घुसपैठ कर इस देश के विभिन्न प्रांतों में अवैध रूप से बसने लगे और यहां रहकर ये घुसपैठिये आजकल बांग्लादेश से नशीली दवा ‘इयोबा’ की तस्करी कर रहे हैं। लेकिन यह ‘इयोबा’ आख़िर है क्या चीज़ ? दरअसल यह एक प्रकार की नशीली दवा है जो कि गुलाबी गोलियों (टैबलेट) के रूप में मिलती है। मेथैम्फेटामाइन ( Methamphetamine) व  कैफेइन ( Caffeine ) के मिश्रण से यह नशीली दवा बनाई जाती है। हाल ही में बांग्लादेश में बड़ी मात्रा में इस दवा की गोलियां पकड़ी गईं। तस्करों की धर-पकड़ हुईं, जिनमें अधिकांश ये रोहिंग्या मुस्लिम ही निकले। बांग्लादेशी गुप्तचरों की पूछताछ से पता चला कि ये रोहिंग्या तस्कर भारत में बसे अपने बिरादरीवालों के जरिए इन गोलियों की भारत में तस्करी कर रहे हैं।  यदि  नशीली दवा की इस तस्करी को रोका न जाए तो इसके नकारात्मक प्रभाव भारत के युवा वर्ग पर पड़ना तय है, संबंधित लोगों का ऐसा ही मानना है।

दो से अधिक बच्चे पैदा करने पर मताधिकार छीन लेना चाहिए: योगगुरु बाबा रामदेव

ramdevयोगगुरु बाबा रामदेव ने इससे पहले भी एक बार जन्म नियंत्रण के लिए क़ानून लाए जाने की बात कही थी। लेकिन इस बार उन्होंने कड़ा रुख़ अख़्तियार कर लिया। जन्म नियंत्रण पर बाबा रामदेव की सलाह यह है कि दो से अधिक बच्चे पैदा करने वालों से छीन लिया जाना चाहिए वोट देने का अधिकार। किसी भी चुनाव में उम्मीदवार होने का अधिकार भी ऐसे व्यक्तियों को न मिले। बीते 24 जनवरी को अलीगढ़ के एक कार्यक्रम में उन्होंने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस देश में जन्म नियंत्रण हेतु चाहे हिंदू हो या मुस्लिम दो से अधिक बच्चे होने पर उक्त दम्पति के सभी प्रकार की सुविधाएं छीन लेनी होंगी। सिर्फ़ मताधिकार ही नहीं बल्कि सभी सहूलियतें मसलन शिक्षा, सरकारी नौकरी, इलाज़ आदि से जुड़ी सभी सुविधाएं भी छीन लेनी होंगी। इससे पहले उन्होंने कहा था कि उनके जैसे लोग जिन्होंने शादी ही नहीं की उन्हें विशेष सम्मान मिलना चाहिए। दूसरी ओर उन्होंने दो से अधिक बच्चे पैदा करनेवाले दम्पतियों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने की बात कही थी। इस बार उन्होंने  उन दम्पतियों की शिक्षा, चिकित्सा व सरकारी नौकरी से जुड़ी सुविधाएं भी छीन लिए जाने पर जोर दिया। उनका कहना है कि ऐसा करने से ही जनसंख्या नियंत्रित होगी।

हावड़ा जिले के आमता में असहाय-अभागों के बीच कंबल वितरण

बीते 12 जनवरी को वीर हिंदू सन्यासी स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर हिंदू संहति की ओर से स्वामीजी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही असहाय-अभागों के बीच  कंबल वितरण किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन हावड़ा जिले के आमता थानांतर्गत दक्षिण हरिशपुर गांव में किया गया था। हिंदू संहति के अध्यक्ष श्री देबतनु भट्टाचार्य ने स्वामी विवेकानंद की तस्वीर पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उसके बाद हरिशपुर तथा आसपास के गांवों के 200 दरिद्र वृद्धों व महिलाओं को कंबल बांटे गए।  कार्यक्रम के आयोजन में कोलकाता के मैग्नम (Magnum) परिवार ने हिंदू संहति को सहयोग दिया।

इस कार्यक्रम में श्री देबतनु भट्टाचार्य जी के अतिरिक्त हिंदू संहति के मुख्य सचिव श्री सुंदर गोपाल दास,सहायक सचिव श्री मुकुंद कोले, सलाहकार श्री चित्तरंजन डे तथा कोलकाता के मैग्नम परिवार की ओर से श्रीमती मीना अगरवाल,श्री संजीव टांटिया व श्री वीरेन्द्र मोदी प्रमुख गण्यमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

भारत_के_इस्लामीकरण के लिए क्या-क्या किया जा रहा है ?

मुसलमान भारत का इस्लामीकरण क्यों करना चाहते है ?
जानिये — क्या सोचते है ये लोग….
पाकिस्तान मिलने के बाद मुसलमानों ने नारा दिया :
*”हँस के लिया है पाकिस्तान, लड़के लेंगे हिन्दोस्तान”।*
इसीलिए १९४७ से ही भारत में इस्लामी जिहाद जारी है जिसमें प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तानी एवं भारतीय मुसलमान सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
देखिए कुछ प्रमाण :-
(i) हकीम अजमल खां ने कहा ”एक ओर भारत और दूसरी ओर एशिया माइनर(तुर्की) भावी इस्लामी संघ रूपी जंजीर की दो छोर की कड़ियां हैं जो धीर-धीरे, किन्तु निश्चय ही बीच के सभी देशों को एक विशाल संघ में जोड़ने जा रही हैं” (भाषण का अंश खिलाफत कंफारेंस, अहमदाबाद १९२१, आई.ए.आर. १९९२, पृ. ४४७)
(ii) कांग्रेस नेता एवं भूतपूर्व शिक्षा मंत्री अबुल कलाम आजाद ने पूरे भारत के इस्लामीकरण की वकालत करते हुए कहा– ”भारत जैसे देश को जो एक बार मुसलमानों के शासन में रह चुका है, कभी भी त्यागा नहीं जा सकता और प्रत्येक मुसलमान का कर्तव्य है कि उस खोई हुई मुस्लिम सत्ता को फिर से प्राप्त करने के लिए प्रयत्न करना” — बी.आर. नन्दा, गाँधी ,पैन इस्लामिज्म, इम्पीरियलज्म एण्ड नेशनलिज्म पृ. ११७)
(iii) एफ. ए. दुर्रानी ने कहा- ”भारत-सम्पूर्ण भारत हमारी पैतृक सम्पत्ति है । उसपर फिर से इस्लाम के लिए विजय प्राप्त करना नितांत आवश्यक है तथा पाकिस्तान का निर्माण इसलिए महत्वपूर्ण था कि उसका शिविर यानी पड़ाव बनाकर शेष भारत का इस्लामीकरण किया जा सके।”
(पुरुषोत्तम, मुस्लिम राजनीतिक चिन्तन और आकांक्षाएँ, पृ. ५१,५३)
(
iv) मौलाना मौदूदी का कथन है कि ”मुस्लिम भी भारत की स्वतंत्रता के उतने ही इच्छुक थे जितने कि दूसरे लोग। किन्तु वे इसे एक साधन, एक पड़ाव मानते थे, ध्येय (मंजिल) नहीं। उनका ध्येय एक ऐसे राज्य की स्थापना का था जिसमें मुसलमानों को विदेशी अथवा अपने ही देश के गैर-मुस्लिमों की प्रजा बनकर रहना न पड़े। वह इसलामी शासन यानी दारूल-इस्लाम (शरीयः शासन) की कल्पना के, जितना सम्भव हो, निकट हो। मुस्लिम, भारत सरकार में, भारतीय होने के नाते नहीं, मुस्लिम होने की हैसियत से भागीदार हों।”
(डॉ. ताराचन्द्र, हिस्ट्री ऑफ दी फ्रीडम मूवमेंट, खंड ३, पृ. २८७)
(v) हामिद दलवई का मत है कि ”आज भी भारत के मुसलमानों और पाकिस्तान में भी ऐसे प्रभावशाली गुट मौजूद हैं, जिनकी अन्तिम मांग पूरे भारत का इस्लाम में धर्मान्तरण है”। (मुस्लिम डिलेमा इन इंडिया, पृ. ३५)
(vi) बांग्लादेश के जहांगीर खां ने ”बांग्लादेश, पाकिस्तान, कश्मीर तथा पश्चिमी बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब व हरियाणा के मुस्लिम-बहुल कुछ भागों को मिलाकर मुगलियास्थान नामक इस्लामी राष्ट्र बनने का सपना संजोया है।” (मुसलमान रिसर्च इंस्टीट्‌यूट, जहांगीर नगर, बांग्लादेश, २०००)
(vii) सउदी अरेबिया के प्रोफेसर नासिर बिन सुलेमान अल उमर का कथन है कि ”भारत स्वयं टूट रहा है।
यहाँ इस्लाम तेज गति से बढ़ रहा है और हजारों मुसलमान, पुलिस, सेना और राज्य शासन व्यवस्था में घुस चुके हैं और भारत में इस्लाम सबसे बड़ा दूसरा धर्म है।
आज भारत भी विध्वंस के कगार पर है।
जिस प्रकार किसी राष्ट्र को उठने में दसियों वर्ष लगते हैं उसी प्रकार उसके ध्वंस होने में भी लगते हैं।
*भारत एकदम रातों-रात समाप्त नहीं होगा।*
*इसे धीरे-धीरे समाप्त किया जाएगा।*
*निश्चय ही भारत नष्ट कर दिया जाएगा।”*
 (आर्गे; १८.७.०४)।
इसीलिए मुस्लिम धार्मिक नेता मौलाना वहीदुद्‌दीन ने सुझाव दिया कि –
*”मुसलमानों को कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए और आगे चलकर उनमें से एक निश्चय ही भारत का प्रधान मंत्री हो जाएगा।”*
(हिन्दु. टा. २५.१.९६) (हिन्दु. टा. २५.१.९६)
पाकिस्तानी जिहादियों का उद्‌देश्य भी अगस्त १९४७ का अधूरा कार्यक्रम पूरा करना है यानी पहले कश्मीर और फिर शेष भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाना।
इसके लिए न केवल जिहादी संगठनों बल्कि आई.एस.आई. और तालिबान व पाकिस्तानी सेना का भी समर्थन है क्योंकि भूतपूर्व राष्ट्रपति जिया उल हक ने
*”पाकिस्तानी सेना को ‘अल्लाह के लिए जिहाद’ (जिहाद फ़ी सबीलिल्लाह) का ‘मोटो’ या ‘आदर्श वाक्य’ दिया था।*
(एस. सरीन, दी जिहाद फैक्ट्री पृ. ३२१)
जिहादियों के उद्‌देश्य को स्पष्ट करते हुए मरकज दवाल वल इरशाद के अमीर हाफिज़ मुहम्मद सईद ने कहाः
*”कश्मीर को भारत से मुक्त कराने के बाद लश्करे तयबा वहीं नहीं रुकेगा बल्कि भारतीय मुसलमानों, जिन पर हिन्दुओं द्वारा अत्याचार हो रहे हैं, के सहयोग से आगे जाएगा और उन्हें बचाएगा। कश्मीर तो  असली लक्ष्य भारत तक पहुँचने का दरवाजा है।”*
(नेशन, ४.११.१९९८)।
उन्होंने ७.११.१९९८ को ‘पाकिस्तान टाइम्स’ में लिखाः– ”आखिर में लश्करे तैयबा दिल्ली, तेल अवीब (इज्राइल) और वाशिंगटन के पर झंडा फहराएगा।”
उन्होंने २७ नवम्बर १९९८ को फिर ‘फ्राइडे टाइम्स’ में लिखाः–
*”मुस्लिम समाज की सभी समस्याओं का हल जिहाद है क्योंकि सभी इस्लाम विरोधी ताकतें मुसलमानों के विरुद्ध जुट गई हैं। मुजाहिदीन भारतीय क्रूरताओं, जो कि निरपराधी कश्मीरियों को भयभीत कर रहे हैं; के विरुद्ध जिहाद कर रहे हैं।*
*लश्कर के मुजाहिदीन, विश्व भर में आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”*
इसी लहजे में उन्होंने १८.०८.२००४ को ‘निदा ए मिललक्त’ में लिखा”–
*”वास्तव में पाकिस्तान तो इस महाद्वीप के मुसलमानों के लिए एक देश है। इसीलिए यह कश्मीर बिना अधूरा है। पाकिस्तान भी हैदराबाद, जूनागढ़ और मुम्बई (महाराष्ट्र) के बिना अधूरा है क्योंकि इन राज्यों ने (१९४७ में) पाकिस्तान में विलय की घोषणा की थी।*
*लेकिन हिन्दुओं के कब्जे से मुक्त कराऐं, और उनकी मुस्लिम आबादी को यह आश्वासन दिया जाएगा कि वे पाकिस्तान के पूर्ण होने के लिए हमारा यह लक्ष्य है। हम भारत में वाणी और कलम से यह उद्‌देश्य प्रचारित करते रहेंगे और जिहाद द्वारा उन राज्यों को वापिस लेंगे।”*
(सरीन, वही. पृ. ३१२)
शायद इसीलिए पाकिस्तानी जिहादियों ने २६.११.२००८ को मुम्बई पर हमला किया था। साथ ही यह ऐतिहासिक सत्य है कि १९४७ में सभी राज्यों ने स्वेच्छा से भारत में विलय किया था।
जैसे जैश-ए-मुहम्मद के अध्यक्ष मौलाना “मसूद अजहर”, जिन्हें २००० में कंधार में हवाई जहाज में बन्धक बनाए १६० यात्रियों के बदले छोड़ा गया था, ने हजारों लोगों की उपस्थिति में कहाः
*”भारतीयों और उनको बतलाओ, जिन्होंने मुसलमानों को सताया हुआ है, कि मुजाहिदीन अल्लाह की सेना है और वे जल्दी ही इस दुनिया पर इस्लाम का झंडा फहराएंगे।*
*मैं यहाँ केवल इसलिए आया हूँ कि मुझे और साथी चाहिए। मुझे मुजाहिदीन (जिहादियों) की जरूरत है जो कि कश्मीर की मुक्ति के लिए लड़ सकें। मैं तब तक शान्ति से नहीं बैठूंगा जब तक कि मुसलमान मुक्त नहीं हो जाते।*
*इसलिए (ओ युवकों) जिहाद के लिए शादी करो, जिहाद के लिए बच्चे पैदा करो और केवल जिहाद के लिए धन कमाओ जब तक कि अमरीका और भारत की क्रूरता समाप्त नहीं हो जाती। लेकिन पहले भारत।”*
(न्यूज ८.१.२०००)
तहरीक-ए-तालिबान के सदर हकीमुल्लाह ने कहाः–
*”हम इस्लामी मुल्क चाहते हैं। ऐसा होते ही हम मुल्की सीमाओं पर जाकर भारतीयों के खिलाफ जंग में मदद करेंगे।’*
(दै. जागरण, १६.१०.२००९)
भारतीय व पाकिस्तानी मुसलमान पिछले ६२ वर्षों से एक तरफ कश्मीर में हिंसापूर्ण जिहाद कर रहे हैं जिसके कारण पांच लाख हिन्दू अपने ही देश में शरणार्थी हो गए तथा हजारों सैनिक व निरपराध नागरिक मारे जा चुके हैं
तथा दूसरी तरफ वे शान्तिपूर्ण जिहाद द्वारा भारत सरकार के सामने नित नई आर्थिक, धार्मिक व राजनैतिक मांगें रख रहे हैं।
इनके कुछ नमूने देखिए:—
*1- राजनैतिक मांगे :—*
(१) मुस्लिम व्यक्तिगत कानून का अधिकाधिक प्रयोग एवं सरकारी हस्तक्षेप का विरोध करना,
(२) समान आचार संहिता का विरोध करना,
(३) गैर-कानूनी ढंग से आए बांग्लादेशी मुस्लिमों की वापसी का विरोध करना,
(४) बांग्लादेशी व पाकिस्तानी नागरिकों को विज़ा(visa) अवधि समाप्त होने पर भी रुके रहने में सहयोग देना,
(५) पुलिस, सेना व अर्धसैनिक बलों व संवेदनशील विभागों में मुसलमानों को आरक्षण देने की मांग करना,
(६) पाकिस्तान के लिए सेना सम्बन्धी गुप्तचरी करने एवं उसमें सहयोग देना,
(७) पाकिस्तानी आई.एस.आई. की कार्य योजनाओं में सहयोग देना,
(८) जिहादी कार्यों के लिए नशीले पदार्थों की तस्करी करना,
(९) नकली नोटों का प्रसार करना या दूसरों से करवाना,
(१०) भारत में राजनैतिक अस्थिरता एवं अलगाववाद पैदा करने के लिए आंदोलनों में सहयोग देना,
(११) म्युनिसिपल, राज्य एवं संसद के चुनावों में विभिन्न राजनैतिक पार्टियों के सहयोग से मुस्लिम या मुस्लिम हितकारी नेताओं को कूटनीति से वोट डालकर चुनाव में जिताना, और अधिकाधिक राजनैतिक सत्ता एवं आर्थिक लाभ प्राप्त करना,
(१२) मुस्लिम वोट बैंक के बदले अधिकाधिक राजनैतिक, धार्मिक व आर्थिक सुविधाओं की मांग आदि आदि।
*2:— मुसलमानों के लिए सरकारी आर्थिक सहायता व नौकरियों में आरक्षण—*
(१) मुसलमान युवकों को रोजगार-परक शिक्षा के लिए मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में सरकारी स्कूल खुलवाना,
(२) उर्दू के विकास के लिए संघर्ष करना,
(३) सामान्य व प्रोफेशनल कॉलेजों में दाखिले के लिए आरक्षण मांगना,
(४) स्पर्धा वाली सरकारी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष वजीफा व सुविधाएं आदि मांगना,
(५) सरकारी व गैर-सरकारी संस्थाओं में नौकरियों में आरक्षण मांगना,
(६) निजी व्यवसाय खोलने के लिए कम ब्याज दर पर पर्याप्त ऋण पाने की मांग करना आदि।
*3:— धार्मिक कार्यों के लिए आर्थिक सहायता—*
(१) बढ़ती मुस्लिम जनसंखया के लिए अधिकाधिक हज के लिए सब्सिडी की मांग करना,
(२) मुस्लिम बहुल वह अन्य राज्यों में भी हज हाउसों की स्थापना की मांग करना,
(३) मस्जिद, मदरसा व धार्मिक साहित्य के लिए प्राप्त विदेशी सहायता पर सरकारी हस्तक्षेप का विरोध करना,
(४) उर्दू के अखबारों के लिए सरकारी विज्ञापन एवं धार्मिक साहित्य छापने के लिए सस्ते दामों पर कागज का कोटा माँगना,
(५) मस्जिदों के इमामों के लिए वेतन माँगना,
(६) वक्फ बोर्ड के नाम पर राष्ट्रीय सम्पत्ति पर कब्जा करना एवं सरकारी सहायता मांगना आदि।
*4:— कट्‌टरपंथी इस्लामी शिक्षा का प्रसार—*
(१) इसके लिए सरकारी सहायता की मांग करना तथा कम्प्यूटर के प्रशिक्षण के बाद इन्टरनेट, ई-मेल आदि से इस्लाम का प्रचार करना;
(२) मदरसों द्वारा धार्मिक कट्‌टरता पैदा करना
(३) अनाधिकृत मदरसों और मस्जिदों में गुपचुप आतंकवाद का प्रशिक्षण देना,
(४) अरबी संस्कृति को अपनाने पर बल देना,
(५) मदरसों में आधुनिक विषयों की शिक्षा को बढ़ावा देने व पाठ्‌यक्रम में सुधार में सरकार के प्रयास पर आपत्ति करना,
(६) मदरसों के प्रबंधन में किसी भी प्रकार के सरकारी हस्तक्षेप का विरोध करना आदि।
*5:— मुस्लिम जनसंखया-*
 मुस्लिम जनसंखया वृद्धि दर को बढ़ाना ताकि अगले १५-२० वर्षों में वे बहुमत में आकर भारत की सत्ता के स्वतः वैधानिक अधिकारी हो जावें। इसके लिए —
(१) बहु-विवाह करना,
(२) परिवार नियोजन न अपनाना,
(३) हिन्दू लड़कियों का अपहरण करना,
(४) धनी व शिक्षित हिन्दू लड़कियों को स्कूल व कॉलेजों में तथा कार्यालयों में प्रेमजाल में फंसाकर एवं धर्मांतरण कर विवाह करना,
(५) बांग्लादेश के मुसलमान युवकों को योजनापूर्ण ढंग से भारत में बसाना, उनकी यहाँ की लड़कियों से शादी कराना व रोजगार दिलाना,
(६) हिन्दुओं का धर्मान्तरण करना आदि।
*6:— प्रचार माध्यमों पर कब्जा करना—*
(१) गै़र-मुस्लिम लेखकों को आर्थिक व अन्य प्रकार के प्रलोभन देकर इस्लाम हितकारी दृष्टिकोण को पत्र-पत्रिकाओं, प्रचार माध्यमों, रेडियो, टी.वी. आदि में सामग्री प्रस्तुत करना,
(२) फिल्मों में इस्लाम के उदार व मानवीय स्वरूप को प्रस्तुत करना,
३) उच्च पदों पर मुस्लिम एवं मुस्लिम हितमारी व्यक्तियों को बिठाना,
(४) शोध के नाम पर गैर-मुस्लिमों के प्राचीन इतिहास को विकृत करना,
(५) रक्त रंजित भारतीय मुस्लिम इतिहास को उदार प्रस्तुत करना,
(६) हिन्दुओं की धार्मिक व सामाजिक मान्यताओं की खुले आम निंदा करना,
(७) इसके विपरीत इस्लाम पर खुली बहस की जगह ‘जिहाद बिल सैफ’ द्वारा इस्लाम के आलोचकों को प्रताड़ित एवं हत्या करना,
(८) हिन्दुओं का खुले आम धर्मान्तरण करने को तो उचित ठहराना परन्तु यदि कोई मुस्लिम लड़का या लड़की स्वतः हिन्दू बन जाए तो उससे संबंधित हिन्दू पारिवारजनों की हत्या करना आदि।
आश्चर्य तो यह है कि
*एक तरफ सरकार भारत को  “धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र” कहती है … और दूसरी तरफ धर्म के आधार पर मुसलमानों व ईसाइयों को विशेष सुविधाएँ देती है .. जो पूर्णतया असंवैधानिक है।*
*इसके अलावा १५ प्रतिशत भारतीय मुसलमान किसी भी “मापदण्ड” में “अल्पसंखयक” नहीं हैं।*

गंगासागर मेले में बाइबिल वितरण

गंगासागर मेले में पुण्यस्नान को आये श्रृद्धालुओं के बीच ईसाइयों के धर्मग्रंथ बाइबिल की प्रतियां बांटी गईं,जिसे लेकर किसी को कोई परवाह नहीं !

इवांजेलिकल चर्च आफ इंडिया (Evangelical Church of India) की ओर से गंगासागर मेले में मुफ़्त बाइबिल वितरण किया गया। गंगासागर मंदिर के निकट स्थित हेलिपैड के आसपास बाइबिल की प्रतियां बांटी गईं। हिंदू से ईसाइयत में धर्मांतरित बरुण प्रामाणिक और उनकी पत्नी सुलोचना प्रामाणिक को बाइबिल वितरित करते देखा गया।कई पेटियों में भर-भर कर बाइबिल की प्रतियां मंगाई गई थीं। हिंदी ( पवित्र ग्रंथ के नाम से) तथा बांग्ला (नतुन नियम नाम से)-दोनों ही भाषाओं में अनूदित बाइबिल की प्रतियां बांटी गईं ‌।
कुछ ग़ैर बंगाली तीर्थयात्रियों के विरोध जताने पर वे चुपचाप अपना सामान लपेट कर वहां से निकल भागे। पूछने पर उन्होंने बताया कि वे पिछले तीन सालों से गंगासागर मेले में बाइबिल वितरण कर रहे हैं।अब तक तीन लाख से अधिक प्रतियां बांट चुके हैं। उनके हिंदू नाम के बारे में पूछे जाने पर बताया कि ईसाइयत में धर्मांतरित हुए हैं, नाम परिवर्तन की कोई आवश्यकता नहीं है।
हिंदुओं का आक्रामक न होना ही विधर्मियों की ऐसी धृष्टता का कारण माना जा सकता है।

अलीपुरदुआर की ईसाई युवती अपर्णा की सनातन हिंदू धर्म में घर वापसी

shyam-anjaliअलीपुरदुआर के कोहिनूर चाय बागान की ईसाई युवती अपर्णा ओरांव ( नाम परिवर्तित ) ने ईसाइयत त्याग कर अपने पुर्वजों के सनातन धर्म में प्रत्यावर्तन किया। सालों पहले अपर्णा के परिवार की दरिद्रता का फायदा उठाते हुए ईसाइयत में धर्मांतरित किया गया था। उसके बाद से परिवार के सभी सदस्य ईसाइयत को ही अपना धर्म मानने लगे। इसी बीच (बीते कुछ सालों से) धैलाझरा चाय बागान के हिंदू युवक श्रीराम खड़िया के साथ अपर्णा का प्रेम संबंध स्थापित हो गया था। लेकिन जब श्याम ने अपर्णा से शादी करना चाहा तो चर्च की अगुवाई में ईसाइयों ने उसमें बाधा डाली। यहां तक कि श्याम  के परिवारवालों ने भी युवती के ईसाई होने पर  इस शादी में ऐतराज़ जताया।
ऐसे हालात में हिंदू संहति के स्थानीय कार्यकर्ता उनकी मदद हेतु आगे आए। उनकी देखरेख में ही स्थानीय शिवमन्दिर में अपर्णा की ‘घर वापसी’ कराई गई। उसके बाद उसी शिवमन्दिर में उन दोनों का विवाह  हिंदू रीति से संपन्न हुआ। श्याम खड़िया का परिवार भी खुशी खुशी नववधु को अपना लिया ‌ हिंदू संहति की ओर से आगे भी उक्त दम्पति का साथ देने का आश्वासन दिया गया।

বীরভূমের মহম্মদ বাজারে সাম্প্রদায়িক উত্তেজনা, নামলো RAF

গত শুক্রবার বিসর্জনের সময় হিন্দু মেয়েদের শ্লীলতাহানি করার চেষ্টা করে কিছু মুসলিম যুবক কিন্তু স্থানীয় হিন্দুদের দৃঢ়তায় তারা তাদের উদ্দেশ্যে সফল হয়না। আজ সকালে ঐ মুসলিম যুবকেরা অমিত ব্যানার্জী নামে এক ব্যক্তিকে মহম্মদ বাজারে বেধড়ক মারধোর করে। অমিত ব্যানার্জীকে মরণাপন্ন অবস্থায় ……..(বিস্তারিত )

हिन्दू संहति की महामिछिल

साथ आयें: 16 अगस्त “गोपाल मुख़र्जी स्मरण दिवस” मनायें
1946-47 की गणहत्या के दिनों में
हिन्दू वीर ‘गोपाल मुख़र्जी’ के बलिदान को प्रणाम।।
हम इतिहास की वामपंथी गलतियाँ सुधार के रहेंगे।
।। हिन्दू संहति की महामिछिल।।
प्रारम्भ स्थान : राजा सुबोध मल्लिक स्कॉयर। दोपहर – १ बजे।
समाप्ति : श्यामबाज़ार नेताजी मूर्ति के नीचे।

जब कुल 21सिखों ने 12हज़ार अफगानी लुटेरों के छक्के छुड़ा दिए और जीत लिया युद्ध

1ये लड़ाई यूरोप के सभी स्कूलो मेँ पढाई जाती है पर हमारे देश में इसे कोई जानता तक नहीं
एक तरफ 12 हजार अफगानी लुटेरे …..तो दूसरी तरफ 21
सिख …….

अगर आप को इसके बारे नहीं पता तो आप अपने इतिहास से बेखबर है।
आपने “ग्रीक सपार्टा” और “परसियन” की लड़ाई के बारे मेँ सुना होगा …… इनके ऊपर “300” जैसी फिल्म भी बनी है ….पर अगर आप “सारागढ़ी” के बारे मेँ पढोगे तो पता चलेगा इससे महान लड़ाई सिखलैँड मेँ हुई थी …… बात 1897 की है …..

नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर स्टेट मेँ 12 हजार अफगानोँ ने हमला कर दिया …… वे गुलिस्तान और लोखार्ट के किलोँ पर कब्जा करना चाहते थे ….
इन किलोँ को महाराजा रणजीत सिँघ ने बनवाया था ….. इन किलोँ के पास सारागढी मेँ एक सुरक्षा चौकी थी ……. जंहा पर 36 वीँ सिख रेजिमेँट के 21 जवान तैनात थे ….. ये सभी जवान माझा क्षेत्र के थे और सभी सिख थे ….. 36 वीँ सिख रेजिमेँट मेँ केवल साबत सूरत (जो केशधारी हों) सिख भर्ती किये जाते थे ……. ईशर सिँह के नेतृत्व मेँ तैनात इन 20 जवानोँ को पहले ही पता चल गया कि 12 हजार अफगानोँ से जिँदा बचना नामुमकिन है …….
फिर भी इन जवानोँ ने लड़ने का फैसला लिया और 12 सितम्बर 1897 को सिखलैँड की धरती पर एक ऐसी लड़ाई हुयी जो दुनिया की पांच महानतम लड़ाइयोँ मेँ शामिल हो गयी ….. एक तरफ 12 हजार अफगान थे …..
तो दूसरी तरफ 21 सिख …….
यंहा बड़ी भीषण लड़ाई हुयी और 600-1400 अफगान मारे गये और अफगानोँ की भारी तबाही हुयी ….. सिख जवान आखिरी सांस तक लड़े और इन किलोँ को बचा लिया …….. अफगानोँ की हार हुयी ….. जब ये खबर यूरोप पंहुची तो पूरी दुनिया स्तब्ध रह गयी ……ब्रिटेन की संसद मेँ सभी ने खड़ा होकर इन 21 वीरोँ की बहादुरी को सलाम किया ….. इन सभी को मरणोपरांत इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट दिया गया ……. जो आज के परमवीर चक्र के बराबर था ……
भारत के सैन्य इतिहास का ये युद्ध के दौरान सैनिकोँ द्वारा लिया गया सबसे विचित्र अंतिम फैसला था …… UNESCO ने इस लड़ाई को अपनी 8 महानतम लड़ाइयोँ मेँ शामिल किया …… इस लड़ाई के आगे स्पार्टन्स की बहादुरी फीकी पड़ गयी …… पर मुझे दुख होता है कि जो बात हर भारतीय को पता होनी चाहिए …… उसके बारे मेँ कम लोग ही जानते है …….ये लड़ाई यूरोप के स्कूलो मेँ पढाई जाती है पर हमारे यहा जानते तक नहीँ