বীরভূমের মহম্মদ বাজারে সাম্প্রদায়িক উত্তেজনা, নামলো RAF

গত শুক্রবার বিসর্জনের সময় হিন্দু মেয়েদের শ্লীলতাহানি করার চেষ্টা করে কিছু মুসলিম যুবক কিন্তু স্থানীয় হিন্দুদের দৃঢ়তায় তারা তাদের উদ্দেশ্যে সফল হয়না। আজ সকালে ঐ মুসলিম যুবকেরা অমিত ব্যানার্জী নামে এক ব্যক্তিকে মহম্মদ বাজারে বেধড়ক মারধোর করে। অমিত ব্যানার্জীকে মরণাপন্ন অবস্থায় ……..(বিস্তারিত )

हिन्दू संहति की महामिछिल

साथ आयें: 16 अगस्त “गोपाल मुख़र्जी स्मरण दिवस” मनायें
1946-47 की गणहत्या के दिनों में
हिन्दू वीर ‘गोपाल मुख़र्जी’ के बलिदान को प्रणाम।।
हम इतिहास की वामपंथी गलतियाँ सुधार के रहेंगे।
।। हिन्दू संहति की महामिछिल।।
प्रारम्भ स्थान : राजा सुबोध मल्लिक स्कॉयर। दोपहर – १ बजे।
समाप्ति : श्यामबाज़ार नेताजी मूर्ति के नीचे।

जब कुल 21सिखों ने 12हज़ार अफगानी लुटेरों के छक्के छुड़ा दिए और जीत लिया युद्ध

1ये लड़ाई यूरोप के सभी स्कूलो मेँ पढाई जाती है पर हमारे देश में इसे कोई जानता तक नहीं
एक तरफ 12 हजार अफगानी लुटेरे …..तो दूसरी तरफ 21
सिख …….

अगर आप को इसके बारे नहीं पता तो आप अपने इतिहास से बेखबर है।
आपने “ग्रीक सपार्टा” और “परसियन” की लड़ाई के बारे मेँ सुना होगा …… इनके ऊपर “300” जैसी फिल्म भी बनी है ….पर अगर आप “सारागढ़ी” के बारे मेँ पढोगे तो पता चलेगा इससे महान लड़ाई सिखलैँड मेँ हुई थी …… बात 1897 की है …..

नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर स्टेट मेँ 12 हजार अफगानोँ ने हमला कर दिया …… वे गुलिस्तान और लोखार्ट के किलोँ पर कब्जा करना चाहते थे ….
इन किलोँ को महाराजा रणजीत सिँघ ने बनवाया था ….. इन किलोँ के पास सारागढी मेँ एक सुरक्षा चौकी थी ……. जंहा पर 36 वीँ सिख रेजिमेँट के 21 जवान तैनात थे ….. ये सभी जवान माझा क्षेत्र के थे और सभी सिख थे ….. 36 वीँ सिख रेजिमेँट मेँ केवल साबत सूरत (जो केशधारी हों) सिख भर्ती किये जाते थे ……. ईशर सिँह के नेतृत्व मेँ तैनात इन 20 जवानोँ को पहले ही पता चल गया कि 12 हजार अफगानोँ से जिँदा बचना नामुमकिन है …….
फिर भी इन जवानोँ ने लड़ने का फैसला लिया और 12 सितम्बर 1897 को सिखलैँड की धरती पर एक ऐसी लड़ाई हुयी जो दुनिया की पांच महानतम लड़ाइयोँ मेँ शामिल हो गयी ….. एक तरफ 12 हजार अफगान थे …..
तो दूसरी तरफ 21 सिख …….
यंहा बड़ी भीषण लड़ाई हुयी और 600-1400 अफगान मारे गये और अफगानोँ की भारी तबाही हुयी ….. सिख जवान आखिरी सांस तक लड़े और इन किलोँ को बचा लिया …….. अफगानोँ की हार हुयी ….. जब ये खबर यूरोप पंहुची तो पूरी दुनिया स्तब्ध रह गयी ……ब्रिटेन की संसद मेँ सभी ने खड़ा होकर इन 21 वीरोँ की बहादुरी को सलाम किया ….. इन सभी को मरणोपरांत इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट दिया गया ……. जो आज के परमवीर चक्र के बराबर था ……
भारत के सैन्य इतिहास का ये युद्ध के दौरान सैनिकोँ द्वारा लिया गया सबसे विचित्र अंतिम फैसला था …… UNESCO ने इस लड़ाई को अपनी 8 महानतम लड़ाइयोँ मेँ शामिल किया …… इस लड़ाई के आगे स्पार्टन्स की बहादुरी फीकी पड़ गयी …… पर मुझे दुख होता है कि जो बात हर भारतीय को पता होनी चाहिए …… उसके बारे मेँ कम लोग ही जानते है …….ये लड़ाई यूरोप के स्कूलो मेँ पढाई जाती है पर हमारे यहा जानते तक नहीँ

इसरत जहान केसः नरेंद्र मोदी को फंसाने के लिए चिदंबरम ने तथ्यों से की छेड़छाड़!

Ishrat-Jahanगुजरात के इशरत जहां एनकाउंटर केस में हाल के दिनों में लगातार कई खुलासे हुए हैं।इन खुलासों की कड़ी में एक और खुलासा हुआ है। समाचार चैनल टाइम्स नाउ ने इशरत जहां केस में पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम की भूमिका को लेकर बड़ा खुलासा किया है। टाइम्स नाउ के मुताबिक इशरत जहां केस में केंद्र सरकार की दाखिल किए गए पहले हलफनामे पर पी चिदंबरम ने साइन किए थे।

टाइम्स नाउ का कहना है किइशरत जहां केस से संबंधित फाइलें उसके पास हैं जो RTI के जरिए हासिल की गई हैं। चैनल का कहना है कि इशरत केस की फाइलें इशारा कर रही हैं कि पी चिदंबरम ने एस केस में तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की थी। लगभग 70 पन्नों वाली इशरत जहां केस की फाइल में सरकारी नोटिंग्स, साइन, कानूनी दस्तावेज, और कई अटैचमेंट्स हैं जिन्हें पहले कभी सार्वजनिक नहीं किया गया था। इस खुलसे के बाद एक बार फिर से पी चिदंबरम इस केस के केंद्र में आ गए हैं।

इस खुलासे के मुताबिक इशरत जहां से जुड़े पहले हलफनामे में पी चिदंबरम ने बदलाव किए थे। हालांकि चिदंबरम इस से इंकार करते रहे हैं। आपको बता जदें कि पहले हलफनामे में इशरत जहां को आतंकवादी बताया गया था जो गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के मिशन पर थी। नए खुलासे के मुताबिक उस हलफनामे को खुद पी चिदंबरम ने मंजूरी दी थी। अब सवाल खड़ा हो रहा है कि जब पहले हलफनामे को चिदंबरम ने मंजूरी दी थी तो दूसरे हलफनामे की जरूरत क्यों पड़ गई।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा पहला हलफनामा दाखिल करने के कुछ दिनों बाद ही केंद्र सरकार ने गुजरात हाईकोर्ट में दूसरा हलफनामा दाखिल किया था। इस हलफनामे में केंद्र सरकार ने अपना स्टैंड बदलते हुए कहा था कि इशरत आतंकी नहीं थी। दूसरे हलफनामे में कहा गया कि इशरत के खिलाफ कोई निर्णायक सबूत नहीं है। इस खुलासे के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। वहीं कांग्रेस की तरफ से इस मुद्दे पर अभी तक प्रतिक्रिया नहीं आई है। साफ है कि ये खुलासा एक बार फिर से सिय़ासत को गरमाने के लिए काफी है।

रोहतास में मुस्लिम समुदाय के जुलूस में खुलेआम लगे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे

बिहार के रोहतास जिले के बिक्रमजंग में सालाना उर्स के मौके पर पुलिस की मौजूदगी में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने खुलेआम पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए।आतिशबाजी के साथ उपद्रव मचाते हुए युवकों ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। पुलिस-प्रशासन इस बात को मानने से इंकार कर रही है, लेकिन शहरवासियों में नारे के बाद गुस्सा व्याप्त है। लोगों को यह नारा लगाए जाने की जैसे ही सूचना मिली, लोग शहर की सड़कों पर निकल गए। लोगों का गुस्सा फूटने ही वाला था कि मौके पर पुलिस पहुंच गई।

 प्राप्त जानकारी के अनुसार ये नारे रामनवमी के दिन निकले भव्य जुलूस से खफा मुस्लिम समुदाय के लड़कों द्वारा लगाए गए हैं । लड़के इतने खफा थे कि जुलूस के दौरान आरा से सासाराम जा रही एक ऑल्टो कार वाले की पिटाई भी कर दी। विरोध करने पर कार के शीशे तोड़ दिए

शरई कानून वाले देश में चले जाएं शरीयत की वकालत करने वाले : आदित्यनाथ

109695-adityanathअपने विवादित बयानों के लिये अक्सर चर्चा में रहने वाले भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ ने शरई कानूनों में अदालतों के जरिये दखलंदाजी पर आपत्ति दर्ज कराने वाले ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर हमला करते हुए कहा कि ऐसा कहने वालों को शरीयत कानून से चलने वाले देश चले जाना चाहिये।

आदित्यनाथ ने यहां संवाददाताओं से कहा कि बोर्ड ने शरई कानून में दखलंदाजी का आरोप लगाया है, मगर भारत शरीयत से नहीं चलेगा। यह देश एक संविधान और विधान से चलेगा। शरई कानून में हस्तक्षेप ना करने की मांग उठाने वाले लोगों को ऐसे मुल्क चले जाना चाहिये जहां यह कानून लागू हो।

उन्होंने कहा कि अदालतों के जरिये शरीयत में हस्तक्षेप के आरोप वाला बोर्ड का बयान दरअसल न्यायालय की अवमानना के दायरे में आता है। मालूम हो कि ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने शनिवार को आरोप लगाया था कि अदालतों के जरिये मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप किया जा रहा है और वह केन्द्र से अपील करता है कि शरई कानून का अस्तित्व बनाये रखने के पिछली सरकारों के रुख पर कायम रहा जाए।

बोर्ड के सदस्य जफरयाब जीलानी ने बोर्ड की कार्यकारिणी समिति की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि अदालतों के जरिये पर्सनल ला में दखलंदाजी की जा रही है। उच्चतम न्यायालय में हाल में तलाक के एक मामले समेत कई प्रकरण आये हैं।

उन्होंने कहा था कि बोर्ड की सरकार से अपील है कि शरीयत में किसी तरह की मदाखिलत (हस्तक्षेप) ना हो। पूर्व में जिस तरह से सरकारों शरीयत कानून को लेकर सकारात्मक रुख रहा है, वही अब भी कायम रहे।

बिहार के सिवान में रामनवमी जुलूस पर पथराव, फायरिंग

Siwan02aरामनवमी के अवसर पर राज्य के मंदिरों में भीड़ उमड़ रही है। शोभा यात्राएं निकाली जा रही हैं। इस दौरान गोपालगंज व सिवान में चार जगह हिन्दु-मुसलमान, दो गुटों में जमकर पथराव हुआ। इन घटनाओं में कई लोग घायल हो गए। सिवान में मुसलमान उपद्रवियों ने फायरिंग की। पुलिस ने भी हवाई फायरिंग की। गोपालगंज में हिंसक भीड़ ने आगजनी की तथा करीब आधा दर्जन बाइक फूंक दिए।

उधर, राजधानी पटना के महावीर मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए आगे बढ़ने के क्रम में कुछ क्षणों के लिए अफरा-तफरी का माहौल हो गया। इस हल्की भगदड़ में दो-तीन भक्त घायल हो गए। सिवान के नवलपुर में दो गुटों के बीच विवाद हो गया। देखते-देखते तोडफ़ोड़ व पथराव होने लगा। असामाजिक तत्वों ने कई गाडिय़ों के शीशे भी तोड़ दिए। बताया जाता है कि इस दौरान भीड़ में फायरिंग भी की गई।

रामनवमी को निकली भगवान श्रीराम की शोभा यात्रा के दौरान गोपालगंज तथा मीरगंज नगर में दो हिन्दी और मुसलमान समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। दोनों जगह शोभा यात्राओं पर पथराव से माहौल बिगड़ गया। हालांकि, हालात बिगड़ते देख मौके पर भारी संख्या में पहुंची पुलिस ने स्थिति पर काबू पाया।

तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने NIT श्रीनगर में फहरा दिया तिरंगा

भगत सिंह क्रांति सेना के अध्यक्ष तेजिंदर पाल सिंह बग्गा जो ठानकर नयी दिल्ली से चले थे उन्होंने नित गेट के बाहर पहुंचकर वो काम करके भी दिखा दिया साथ ही यह साबित भी कर दिया कि अगर जिगर मजबूत हो तो आतंकवादी और जिहादी किसी को डराकर अपने रास्ते से भटका नहीं सकते। उन्होंने NIT श्रीनगर के गेट के बाहर तिरंगा फहराकर दिखा दिया पूरी दुनिया के सामने अपने साहस का परिचय दिया। हालाँकि पुलिस ने उन्हें तुरंत ही गिरफ्तार भी कर लिया। तेजिंदर पाल सिंह बग्गा की जिद थी कि वे NIT जाकर तिरंगा फहराकर रहेंगे और उन्होंने करके दिखा भी दिया। जिस JIS में जम्मू कश्मीर के उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह और केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति इरानी नहीं जा पायीं वहां पर बग्गा गए भी और तिरंगा भी फहराया।

तेजिंदर पाल सिंह बग्गा 9 अप्रैल को 150 लोगों के साथ ‘चलो NIT’ तिरंगा मार्च लेकर नयी दिल्ली से NIT श्रीनगर के लिए रवाना हर थे, उनका कहना था कि भारत के देशभक्त छात्रों के हाथों से जम्मू कश्मीर पुलिस ने जिस प्रकार से NIT श्रीनगर में तिरंगा छीना है वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है, उन्होंने देशभक्त छात्रों के साथ साथ पूरे हिंदुस्तान का अपमान किया है इसलिए हमने सोचा है कि हम देशभक्त छात्रों को एक तिरंगे के बदले सैकड़ों तिरंगे देकर आयेंगे।

हालाँकि तेजिंदर पाल सिंह बग्गा और उनके साथियों को पुलिस ने जम्मू कश्मीर में प्रवेश नहीं होने दिया और उन्हें लखनपुर बॉर्डर पर अरेस्ट कर लिया, जम्मू कश्मीर पुलिस की इस हरकत की काफी आलोचना हुई। गिरफ्तारी के एक घंटे बाद ही पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया और उन्हें वापस जाने के लिए कहा।

बग्गा के साथ आई बस तो दिल्ली वापस रवाना हो गयी लेकिन तेजिंदर सिंह NIT श्रीनगर जाकर वहां के छात्रों को तिरंगा देने की जिद पर अड़े रहे। इसके बाद पुलिस ने उनसे तिरंगा ले लिया और उन्हें लिखित आश्वासन दिया कि वे खुद NIT श्रीनगर के छात्रों को तिरंगा भिजवा देंगे।

पुलिस के आश्वासन के बावजूद भी तेजिंदर पाल सिंह अपने तीन साथियों के साथ पुलिस की नजरें बचाकर NIT श्रीनगर पहुँच गए और गेट के बाहर तिरंगा फहरा दिया, हालाँकि तिरंगा फहराते समय पुलिस की नजरें उनपर पड़ गयी और पुलिस ने बग्गा को उनके तीन साथियों सहित गिरफ्तार कर लिया।

देवर के साथ सुहागरात के बाद मिलेगा पति !

गाज़ियाबाद: शौहर ने फोन पर बीवी को तलाक दे दिया , लेकिन अब उसे अपनी गलती पर पछतावा है । वह बीवी को दोबारा से साथ रखना चाहता है , लेकिन शरीयत तौर पर वह ऐसा तभी कर सकता है ,जब उसकी बीवी दूसरे मर्द से शादी करे , और सुहागरात मनाये । इसके बाद फिर दूसरा शौहर उसे तलाक दे । इसे हलाला कहते है । अब दोनों को दोबारा साथ रहने के लिए हलाला प्रक्रिया से गुजरना होगा
।काफ़ी जद्दोजहद के बाद सोमवार को दोनों ऐसा करने के लिए राज़ी हो गए । अब महिला एक रात के लिए अपने देवर से शादी करेगी । अगले दिन वह उसे तलाक देगा । इसके बाद पहले वाले शौहर से उसका फिर से निकाह हो जायेगा ।
यह मामला महिला थाने में आया हुआ था । महिला खोड़ा कालोनी की रहने वाली है ,उसकी शादी धौलाना में अगस्त 2013 में हुई थी । पाँच माह पहले अनबन होने पर महिला मायके चली गयी । शौहर ने उसे तीन बार तलाक तलाक तलाक कह कर निकाह ख़त्म कर दिया ।

पिछले महीने महिला ने उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की । महिला थाने में दोनों परिवारो की काउंसलिंग हुई तो तलाक की बात सामने आई । सोमवार को दोनों पक्ष एक बार फिर साथ रहने को तैयार हो गए । लेकिन शरीयत का पेंच आड़े आ गया । महिला इसके लिए राजी नही थी लेकिन अपनी शादी बचाने के लिए उसे ऐसा करना पड़ेगा । दूसरी तरफ शौहर का कहना है कि वह शर्मिंदा है उसे तलाक नही देना चाहिए था । हलाला उसके लिए भी किसी सजा से कम नही ।

वहीँ मौलाना अरशद खालिद का कहना है कि शरीयत में हलाला इसलिए जरुरी है ताकि कोई बात बात पर तलाक ना दे । शादी जैसे बड़े रिश्ते को मामूली ना समझे ।

महिला थाना इंचार्ज अंजू तेवतिया ने बताया कि काउंसलिंग के दौरान दोनों पक्ष शरीयत तरीके से हलाला करके फिर से निकाह को राजी हो गए है ।

लेकिन सवाल उठता है कि आज के इस आधुनिक युग में हलाला जैसे रिवाज़ क्यों ? महिला की क्या गलती जो उस पर इस तरह का बेहूदा और शर्मनाक रिवाज़ थोपा जाये ?

हमारे दलित भाइयों को भी यह समझना आवश्यक है कि उनके साथ कितना बड़ा गेम चल रहा है

Re-development पता है? पुनर्विकास जिसे कहते हैं? पुराना घर तुड़वाकर नया घर बनाना ? शहरों में धड़ल्ले से चल रहा है क्योंकि खाली जगहें बस की बात नहीं होती ।

इस पोस्ट से इसका संबंध पूरा स्पष्ट हो जाएगा, बस धैर्य से पढ़िये । दो मिनट भी नहीं लगेंगे, बात स्पष्ट हो जाएगी । 66 साल का खेल है, दो मिनट तो देंगे आप?

तो मित्रों होता यह है:

आप का घर है । पुराना है, जैसा भी है फिर भी आप का अपना है । लेकिन अक्सर होता यह है कि मनुष्य हमेशा जो उसके पास है उससे असंतुष्ट रहता है । सभी की यही बात है, कोई धर्म या समाज अपवाद नहीं होते ।

तो आप भी अपने घर से धीरे धीरे असंतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन नया बड़ा घर बस की बात नहीं होती । इस वक़्त कोई बिल्डर या बिल्डर का आदमी आप से संपर्क करता है । आप के असंतोष को हवा देता है । आप को यह भी बताता है कि आप को नया घर मिलेगा । है उस से जगह भी बड़ी मिलेगी । ऊपर से पैसे भी मिलेंगे । बस आप अपनी कॉलोनी के भी लोगों को राजी कर लीजिये । आप सब के घर जिसपर खड़े हैं वो कॉलोनी की जमीन बिल्डर को दे दीजिये । वो लिखित एग्रीमंट करेगा । नयी कॉलोनी बनेगी उसमें आप को नया, बड़ा घर और ऊपर से पैसे भी मिलेंगे । बिल्डर उसी जगह पर नयी कॉलोनी में कुछ नए घर बाँधेगा, उन्हें बेचेगा उसमें कमाएगा उसमें ही आप के लिए नए बड़े घर बना देगा । रहने को भी मुफ्त होगा । कोई मेंटेनन्स चार्ज नहीं ।

जब तक वो नए घर बांध रहा है, आप को अन्यत्र रहने के लिए या तो पर्यायी जगह देगा या फिर उतने समय के लिए तय रकम हर महीने देगा अग्रिम चेक से । अक्सर यही होगा कि चेक मिलेंगे । समय भी तय होगा इतने महिने या वर्ष + महिने के अग्रिम चेक आप के हाथ में थमाए जाएँगे । कोई समस्या नही, खुश?

समस्या होनी नहीं चाहिए, मगर होती है । जगह चली जाती है और बिल्डर के चेक दो तीन महीनों बाद बाउन्स होने लगते हैं । बिल्डर भी हाथ ऊपर कर देता है कि उसने सोचा था कि वो कमाएगा और कोई प्रोब्लेम नहीं आयेगा लेकीन वो ही कमा नहीं पाया है । आप शांति से घर जाएँगे तो उसे आप के लिए हमदर्दी होगी, आप तमाशा करेंगे तो उसके पास गुंडे भी होंगे ।

एक और प्रकार भी होता है । घर खरीदते वक़्त सब कहते हैं कि टाइटल क्लियर देख कर लीजिये । जो जगह आप को बेच रहा है वो जगह का मालिक है या नहीं और आप को बेचने को उसे अधिकार है या नहीं यह देख लीजिये । लेकिन कई केसेस सुनने में आते हैं कि पूंजी फूंककर, रहता घर बेच कर लोग नया घर उससे खरीदते हैं जो जगह का मालिक है ही नहीं । घर खाली करने की नौबत आती है तब कोई साथ नहीं होता, दयनीय स्थिति होती है । कभी कभी कोई राजनेता आप की दुर्दशा के बल पर कुछ टीआरपी हासिल कर लेता है लेकिन आखिर आप को खुद ही हालात का हल निकालना होता है ।

इन दोनों परिस्थितियों में आप को पता है कि परिस्थिति बहुत बुरी ही होगी ।

इस पोस्ट से यह स्पष्टीकरण का संबंध यही है कि हिन्दू से ईसाई या मुसलमान हुए दलित का बिलकुल यही हाल है । उसे अपने परिस्थिति से घृणा करने को सिखाया गया । धर्म के प्रति घृणा करने को सिखाया गया । सिखाया गया कि अगर वो हिन्दू है तो वो दलित है – टूटा, कुचला हुआ, जिसका दलन हुआ हो । आइये भाई, आइये ब्रदर, मुसलमान बनिए, ईसाई बनिए, तरक्की करिए, बराबरी करिए उनसे जो आप को नीचा दिखाते थे ।
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क्या आप को पता है कि संविधान के तीसरे अनुच्छेद (अनुसूचित जाती) आदेश 1950 के अनुसार केवल हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति अनुसूचित जाती का दर्जा प्राप्त नहीं कर सकते ।

एडिट: ध्यान रहे कि यह आदेश 1950 का है, और डॉ अंबेडकर का निधन 1956 में हुआ । यह उनके निधन के बाद किया हुआ सुधार नहीं ।
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दर्जा यानि यहाँ संबंध सुविधाओं से है । आरक्षण से है । केवल हिन्दू को है । कानून स्पष्ट है । 1950 से ही है । याने इतने साल ये बिना क्लियर टाइटल के घर बेचते रहे । बिना क्लियर टाइटल के घर बेचना जुर्म है, लेकिन इनहोने तो जिंदगियों का नीलाम फूंका है ।

1950 से हिन्दू दलितों को, ये सब्जबाग दिखाते रहे । शायद शुरुवाती दिनों में निभा पाये हों । अब इनके आत्माओं की फसल काटने के (soul harvesting) टार्गेट्स होते है । अब ये दलितों को कुछ दे नहीं पाते, लेकिन उन्हें के बीच इन्हें काम भी करना होता है । वही दलितों का भेड़ जैसा उपयोग कर के अन्य दलितों को खड्डे में गिराना है । इसलिए इनहोने एक नया राग छेड़ा है ।

सेक्युलर भारत में ईसाई मुस्लिम दलितों पर अन्याय का राग आलाप रहे हैं । कह रहे है कि यह काला कानून है, उसे खारिज कर दीजिये । लाखों दलितों को हिन्दू दलितों के समकक्ष आरक्षण देने की मांग है । अगर एक हिन्दू SC जाती को जो लाभ मिल रहे हैं उसमें ईसाई या मुस्लिम हिस्सा हड़पने की मांग कर रहे हैं, कि हम भी उस जाती के हैं ।

क्या भूल गए कि उस जाती छोड़ने के लिए ही आप ने या आप के पूर्वजों ने धर्मांतरण किया था ? हिन्दू और धर्म के नाम गालियां भी दी थी और आज भी दे रहे हैं ? आज आप के साथ धोखा हुआ है इसलिए आप को जिस आका ने धोखा दिया वो आप को नया झूठ सिखा रहा है ।

मिस्टर फ्री का कुछ ऐसा ही था ना? मोदी जी से पैसे देंगे तो हम फ्री दे सकेंगे? मोदी जी पैसे नहीं दे रहे हैं जी, वे आप का भला नहीं चाहते जी, हम को काम नही करने देते जी…..

या फिर दूसरा उदाहरण प्रेम में फंसाकर घर से भगाई लड़की का, उसको गर्भवती करो या बच्चा भी पैदा करो फिर बाप से पैसे मांगने भेजो … ? उसके लिए घर रहना मुश्किल करो …..

यह भी हो रहा है । कुछ ईसाई संघटनों ने खुलकर आरोप लगाया है कि चर्च के पास अपना साम्राज्य बढ़ाने के लिए पैसे हैं लेकिन गरीब दलित इसाइयों के हालात सुधारने की इनको पड़ी नहीं है । यह भी खुलकर कहा है कि हम से तो हिन्दू दलितों की अवस्था अच्छी है । आज उनको दलित होने की वजह से वहाँ भी तरक्की नहीं मिल रही । पादरी बनने की पढ़ाई तो की लेकिन चर्च वाले पादरी बना नहीं रहे हैं । या कोई दलित पादरी हैं जिन्हें दलित होने के कारण प्रताड़ना का अनुभव करना पड रहा है।

कुल मिलाकर बात ये है कि तिलमिला रहे हैं धर्मांतरण के कारण । लेकिन आज वे शत्रु के सैनिक हैं और शत्रु आज भी उन्हें हमसे लूटने के कारण ही इस्तेमाल कर रहा है ।

आज हिन्दू दलित जो लाभ पा रहा है उससे उसको बेदखल करने यह ईसाई कसाई सेना आ रही है । भारत का भाग्य है माता रोम की कॉंग्रेस सत्ता पर नहीं है नहीं तो वो यह कर डालती ।

जाते जाते एक बात । आप को कई ईसाई मिलेंगे जिनके नाम से पता ही नहीं चलेगा कि वे ईसाई है । क्या कारण है कि इनहोने हिन्दू नाम रखे हैं ? क्या आप को निश्चित पता है कि वे हमारे कोई हिन्दू दलित भाई के लाभ को हड़प नहीं रहे? वैसे यूं करना कानूनन अपराध है, सो अगर आप यह तहक़ीक़ात कर के उसकी पुलिस में शिकायत कराते हैं तो एक हिन्दू दलित भाई बहन का हक बचाने का पुण्य भी आप को मिलेगा ।

चलिये, लंबी हो गई पोस्ट, पूरी पढ़ने का आभार । अगर आप ने नोटिस किया होगा तो मैंने एक भी प्रूफ नहीं दिया है यहाँ । और आप को यह भी पता ही होगा कि बिना प्रूफ के मैं बोलता नहीं । सभी सुरक्शित रखे हैं, देखते हैं कोई इस बात को चैलेंज करने की हिम्मत करता है तो ।

आप से अनुरोध है कि इसे कॉपी पेस्ट ही करें । मेरा नाम भी दे दें, ताकि जो भी बहस करने आए, मेरे पास आए, आप का सिर न खाये । हाँ, लेकिन इसे फैलाइएगा जरूर, हमारे दलित भाइयों को भी यह समझना आवश्यक है कि उनके साथ कितना बड़ा गेम किया है ईसाई कसाई ने । यह फैलाना भी अपनी युद्ध नीति ही है ।