मुसलमानों का सबसे ताकतवर हथियार अल-तकिया

मुसलमानों का सबसे ताकतवर हथियार ‘अल-तकिया’मुसलमानों का सबसे ताकतवर हथियार ‘अल-तकिया’मैं इसलिए किसी भी मुल्ले की बातों पर यकीन नहीं करता …इसने इस्लाम के प्रचार प्रसार में जितना योगदान दिया है उतना इनकी सैंकड़ों हजारों कायरों की सेनायें नहीं कर पायीं ।इस हथियार का नाम है “अल – तकिया”।अल-तकिया के अनुसार यदि इस्लाम के प्रचार , प्रसार अथवा बचाव के लिए किसी भी प्रकार का झूठ, धोखा , द्रऋह करना पड़े – सब धर्म स्वीकृत है ।इस प्रकार अल – तकिया ने मुसलामानों को सदियों से बचाए रखा है ।मुसलमानों के विश्वासघात के अन्य उदाहरण -1 -मुहम्मद गौरी ने 17 बार कुरआन की कसम खाई थी कि भारत पर हमला नहीं करेगा, लेकिन हमला किया ।2 -अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तोड़ के राणा रतन सिंह को दोस्ती के बहाने बुलाया फिर क़त्ल कर दिया ।3 -औरंगजेब ने शिवाजी को दोस्ती के बहाने आगरा बुलाया फिर धोखे से कैद कर लिया ।4 -औरंगजेब ने कुरआन की कसम खाकर श्री गोविन्द सिघको आनद पुर से सुरक्षित जाने देने का वादा किया था.फिर हमला किया था.5 -अफजल खान ने दोस्ती के बहाने शिवाजी की ह्त्या का प्रयत्न किया था ।6-मित्रता की बातें कहकर पाकिस्तान ने कारगिल पर हमला किया था ।लोगों का विश्वास उठ चूका है मुसलमानों से..और ये ऐसी स्थिति है जिसको मुसलमान खुद समझ नहीं पा रहे हैं.. सिर्फ भारत की बात नहीं दुनिया के हर कोने मेंमुसलमानों को शक की नज़र से देखा जा रहा है.. मगर मुसलमान खुद हकीकत से मुह फेरे बैठे हैं.. ये स्थिति बहुत खतरनाक है और विचार करने योग्य है..मुसलमानों ने खुद दुनिया दो हिस्सों में बाँट राखी है एक मुस्लिम समाज औरदूसरा गैर मुस्लिम समाज..परेशानी यहीं से शुरू होती है.. भाई भाई बोलने की सारी बातें बेईमानी है अगर दुनिया ही दो हिस्सों में बटी है इस्लामिक नज़रिए से..इस्लाम की शिक्षा अब सब लोग समझ चुके हैं.. काफिर, मुशरिक, मुनकिर.. अब लोगों को समझ आगया है.अब बच्चा बच्चा जानता है कि काफिर किसको कहते हैं.. और फिर आप बोलते हो की लोग नफरत क्यूँ कर रहे हैं?? काफिर शब्द गाली की तरह इस्तेमाल करोगे फिर लोगों को समझोगे की काफिर मतलब सिर्फ वो जो अल्लाह को न माने.. और शब्द के पीछे जो घृणा छिपी है उसको कैसे छिपाओगे?लोग अब पढ़ रहे हैं और उनको पता है की कट्टर लोगों का दिल पूरे दुनिया में शरीया लागू करने में लगा है..लोग गूगल , ट्विटर , फेसबुक पर उसकी पैरवी करते हैं और बोलते हो लोग नफरत करते हैं आपसे?जिन जिन लोगों ने हिन्दुवों और सिखों पर ज़ुल्म ढाएआप उनकी वकालत करते हो फिर बोलते हो लोग आपसे नफरत करते हैं?मुसलमानों को पूरी दुनिया के मुसलमानों की फ़िक्र रहती है.. जितना आक्रोश आपको इस्राईल पर आता है उतना आपको अपने देश में हुवे किसी और हादसे पर नहीं आता है..अगर दिल में कुछ और हो और ज़बान पर कुछ और तो छोटे बच्चे भी आपकी नियत भांप जाते हैं .. बाकी दुनिया तो बड़ी और समझदार है …कैसे उम्मीद करते हो की आप औरंगजेब और गौरी की तारीफ करो और लोग ये न समझ पाए की आपके दिल में क्या है??लोग कैसे मान जाएँ की आप औरंगजेब की तारीफ़ करके उसकी शिक्षाओं को नहीं अपनाओगे भविष्य में?मैं इस्लाम को इंसानियत का मज़हब उस दिन मानूंगा जिस दिन सऊदी अरब में मंदिर और गुरूद्वारे बनाने की इजाज़त मिलेगी और लोग खुले आम पूजा कर सकेंगे.. इस बात की कोई दलील ही नहीं दी जा सकती है की वो इस्लामिक देश है.. किसका इस्लामिक देश कैसा देश? अगर हम वहां दुसरे धर्मो को जगह नहीं दिलवा सकते हैं तो कम से कम वकालत तो न करें इस बात की.. भारत में बैठ के बोलोगे की सऊदी की पाक ज़मीन पर मंदिर नहीं बन सकता और फिर यहाँ लोग आपको गले लगायें?संभल जाओ अभी सवेरा है.. पूरी दुनिया नफरत करने लगीहै और लोग अब किसी भी रूप में इस्लाम को देखने के लिए भी नहीं तैयार हैं.. होश में आ जाओ तो अच्छा है नहीं तो मिट जाओगे. ……

||श्रधांजली ||

“मम दीक्षा हिंदू रक्षा ” के सच्चे प्रनेता राम जन्मभुमी मुक्ति आंदोलन के सेनापती अखन्ड भारत के समर्थक और माँ वसुन्धरा के वीर सपुतो मे से एक वीर सपुत श्री अशोक सिंघल जी IMG-20151117-WA0008का निधन हो गया | ये उनके शरीर का निधन है उनके विचार और आत्मा का नही, वो राष्ट्रवादी हिंदुत्व के समर्थक थे जब तक इस देश के जितने भी व्यक्ति मे राष्ट्रवाद रहेगा तब तक सिंघल जी अमर रहेंगे| सिंघल जी हम जानते है “वासान्सि जीर्णानी यथा विहाय,नवानी ग्रिहाति नरोपरानी | तथा शरिराणि विहाय जिर्णान्यन्यानी संयाति नवानि देही ||

आपने बस पुराने शरीर को छोडा है क्युकी अब इस बुढे शरीर से राम मंदिर की मुक्ति की लडाई संभव नही हो पा रही थीक्युकी लडाई कुछ ज्यादा ही कठिन बन चुका है, इसिलिये
अब आप एक नये और स्फुर्ती भरे शरीर को लेकर आयेन्गे और राम जन्म भूमि को मुक्त करवाकर राम मंदिर बनवाने के संकल्प को जरुर पुरा करेंगे| सिंघल जी बंगाल आपका विशेस रुप से आभारी रहेगा क्युकी आप ही थे जिसने तपन घोष ( हिंदू सम्हति के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी) को तराष कर बंगाल को एक हिंदू मसिहा और एक हिंदू हृदय सम्राट दिया | “हे वसुनधरा तेरा पुत्र आ रहा है उसको अपने गोद मे समाहित कर ले | आज स्वर्ग मे बडी हलचल और इंद्र के मन्न मे ईर्ष्या भी चल रहि होगी क्युकी उनसे भी ज्यदा ओजस्वी तेजस्वी और स्वर्ग के उत्तराधिकारी स्वर्गाधिपती श्री सिंघल जी जो पधारने वाले है|”

अपने मछली के खेती के तालाब से मछली चोरी रोकने गये राखल विश्वास को मुसलमानो ने मारकर सर फोडा, सर मे पडे 5 टाँके

घटना है दक्षिण 24 परगना जिले के 1 नंबर ब्लोक के अन्तर्गत मौशल ग्राम का|ताड़दह ग्राम पंचायत के अन्तर्गत मे आता है मौशल ग्राम का |यहा प्रचुर मात्रा मे मछलि कि खेती की जाति है | ये खेती करीब 100 बिघे जमीन मे फैली हुई है और इसके मालिक है श्री रामपद मंडल ,श्री केश्टो मंडल और श्री नित्यानन्द मंडल| इस खेती के सुरक्षा मे तैनात थे मौशल के ही स्थानीय व्यक्ति श्री राखल विश्वास , गुड्डू मंडल और राजू दास |गत 14 नवम्बर दिन शनिवार दोपहर के करीब 12 बज रहे थे, ठिक उसी समय स्थानीय नागरिक अली हुसैन और उसके दो भाई मिलकर मछलि चोरी कर रहे थे तभी राखाल विस्वास और राजू दास ने उन्हे चोरी करने से रोका| रोकने के कारण उस समय तो वो दोनो चले गये | उसके बाद राखाल विस्वास, राजू दास और गुड्डू चोरी का कारण जानने के लिये अली हुसैन के घर जाते है | उसी समय अली हुसैन के घर वालो ने रखाल विस्वास और उसके दोनो साथियो पर लाठी और बाँस से हमला कर दिया फल्स्वरुप राजू और राखाल का सर फट जाता है और दोनो काफ़ी जख्मी हो जाते है | इस घटना से स्थानीय हिंदू काफ़ी क्षुब्ध हो जाते है और गुस्साई भिड़ जाकर अली हुसैन के घर को तोड़भांग करती है| बाद मे कोलकाता लेदर कोम्प्लेक्स थाना आकर एक हिंदू को गिरफ़्तार करके ले जाती है | बाद मे हिंदू एक्जुट होकर थाने जाते है ,जिसके दबाव मे आकर पुलिस गिरफ़्तार हिंदू को छोडने को बाध्य होती है| लेकिन अब तक खबरो के अनुसार मछलि चोरी के अभियुक्त अली हुसैन को गिरफ़्तार करने का साहश लेदर कोम्प्लेक्स थाने को अब तक नही हो पाई है|

वर्धमान के बलगना ग्राम मे अष्टमी के दिन हुआ हिंदू और मुसलमानो मे संघर्ष

हिंदुओ के लिये इस बंगाल रूपी मरुभुमी मे दुर्गा पुजा के समय अनेको बार हुए जिहादी आक्रमण| और उसी कडी मे एक नया नाम जुडा है वर्धमान जिले के भाताड़ थाना के अन्तर्गत बलगना ग्राम का | इलाके मे है युवा शक्ति क्लब| किंतु जिहदियो के नजर मे खटका अष्टमी का दिन, पंडाल मे अंजलि चल रही थी | फल्स्वरुप रास्ता बंद था और गाडीयाँ एक अन्य रास्ते से घूमकर जा रही थी| लेकिन रुट बदलने के बात को एक ट्रैक्टर वाला जिसके साथ तीन मुसलमान लड़के थे ने नही माना और जिस रास्ते पर पुजा हो रही थी उसी रास्ते से जाने पर अड़ गया | इसी को लेकर तीनो लड़को और क्लब के लड़को मे झडप शुरू हो जाती है| लेकिन ये झडप लम्बी नही चलती है और क्लब के सदस्य उन तीनो की अच्छी तरह धुलाई करके उन्हे सही रास्ता दिखा देते है| उस समय तो वो ट्रैक्टर ले कर भाग जाते है लेकिन 2/3 घंटे के अंदर करीब 50 मुसलमानो को लेकर पुजा पंडाल मे पहुच जाते है|क्लब के सदस्य इस परिस्थिति के लिये पहले से ही तैयार थे | हिंदुओ ने इस जिहादी हमले का प्रतिकार करने मे जरा भी देरी नही की और उन 50 की भी धुलाई मे कोई कोर कशर नही छोडा|उसके बाद उस पंडाल के पास बने एक मुसलमान के चाय दुकान को भी तोड़ दिया गया और उसे वहा से हटाकर क्लब के सदस्यो ने वहा एक स्थाई पक्के का क्लब बना दिया |

विजय दशमी के दिन वर्धमान के मंगलकोट मे माँ दुर्गा के प्रतिमा के विसर्जन को लेकर हिंदुओ और पुलिस मे हुई झड़प

मंगलकोट के बी•डी •ओ • दफ़्तर के ठिक विपरीत दिशा मे माँ दुर्गा का पंडाल सजा था ,पुजा बडे ही उत्साहपूर्वक कट रहा था |किंतु उस दिन हमारे पवित्र(?) अल्पसंख्यक भाइयो का मुहर्रम भी था, लेकिन अचानक से मस्जिद का माईक भी बजने लगा और अचानक मुसलमान ये माँग करने लगे की पुजा पंडाल का माईक बंद करना होगा | पुजा पंडाल मे जितने भी लोग उपस्थित थे उन्होने ऐसा किसी भी तरिके का विरोध नही देखा था| मुसलमानो के इस नाजयज और अन्यायकारी माँग को उन्होने ठुकरा दिया गया | तब वहा पर उपस्थित मुसलमानो ने पंडाल के लाईट और कुर्सियो को तोड़ना शुरू कर दिया| भय से आतंकित हिंदुओ ने पुलिस को सूचना दिया पुलिस घटना स्थल पर तुरंत पहुची और दोशियो को पकड़ने के वजाय उलटे हिंदुओ पर ही मामला दर्ज कर दिया है| इस अप्र्त्याशित घटना और पुलिस के पक्षपात पूर्ण रवैये से पूरे इलाके मे रोश और गुससे का माहौल बना हुआ है |
इसके बाद सरकारी निर्देशानुसार विसर्जन यात्रा रविवार के दिन जिसमे बहुत बडी मात्रा मे हिंदुओ की उपस्थिति थी, पुलिस के कडे निगरानी मे निकला| सोभायात्रा अजय नदी के पुल के नीचे से जा ही रहा था की ना जाने किसने पुलिस पर कुछ पटाखे फेके और इसी मे एस• पी• ने भिड़ पर लाठी चार्ज का आदेश दे दिया | पुलिस के लाठी चार्ज करते ही जनता और पुलिस मे संघर्ष हो गया| इस घटना मे 17 पुलिस कर्मी घायल हो गये| मंगलकोट के थाने एस•आई• गणेश सेन की रिढ की हड्डी टूट गयी है जिन्हे आर•जी•कर अस्पताल मे भर्ती कराया गया है | अगले दिन पुलिस ने 33 हिंदुओ को गिरफ़्तार किया है | गिरफ़्तार लोगो को वर्धमान जिला अदालत मे पेश किया गया जहा न्यायधिस ने उन्हे 14 दिन की न्यायीक हिरासत मे भेज दिया|

आज 14 Nov. सुबह से ही मुसलमान भारी संख्या मे इकठ्ठा हो रहे है,उन्होने चन्द्रेश्वर रोड ,शंक्सर पुकुर,चन्द्रेश्वर, कालितला,चन्द्रेश्वर बाजार ,सोन्दलिया,बकसर,क्लेरैट और घटकपुकुर के सोनरपुर रोड को भी जाम कर रखा है| यह घटना उत्तर 24 परगना के घटकपुकुर के भान्गोर थाना के अन्तर्गत हुई है| यह कल रात के एक छोटे से घटना के प्रतिक्रिया स्वरुप हो रहा है जिसमे कल कुछ स्थानिय हिंदू माँ कालि की मूर्ति को विसर्जन करने जा रहे ही थे की रास्ते मे जा रहे एक मौलवी की गाडी से एक हल्की सी टक्कर हो जाती है | बस इतने मे ही कुछ मुसलमान गुंडे आये और सभी श्रधालुओ और यहा तक की रास्ते से जा रहे साधारण हिंदुओ को भी बहुत ही बेरहमी से पीटा | जान और महिलाओ के इज्जत के डर से चन्द्रेश्वरपुर से हिंदू का पलायन शुरू भी हो चुका है | मुसलमानो को इकठ्ठा होने का आदेश मस्जिदो से घोषना भी किया जा चुका है| भय का इतना माहौल है की कही भी रास्ते कोई हिंदू नजर नही आ रहा है | पूरे इलाके मे रैफ और पुलिस बल तैनात किये जा चुके है, किंतु हिंदुओ का यह डर और शंका है की हिंदुओ को किसी भी बडे पैमाने के आक्रमण से बचाने के लिये इतना कम सुरक्षा बल पर्याप्त नही है और आक्रमणकारी मुसलमानो की संख्या इतनी है की वो कभी भीहावी हो सकते है| स्थानिय हिंदू बहुत ही भयभीत और आतंकित है| अगर कोई भी अप्रिय घटना होती है तो हिंदुओ को वहा से भागने के अलावा कोई भी रास्ता नही है ,बहरहाल इलाके मे बहुत ही तनाव और दहशत का माहौल है|

मुहर्रम के जुलूस से पुलिस पर  हमला ,कलिग्राम मे सांप्रदायिक उत्तेजना का माहौल

(24 अक्तुबर 2015) आज सुबह से ही मालदह के चाँचल थाना के अन्तर्गत कलिग्राम मे मुहर्रम के जुलूस को लेकर सांप्रदायिक उत्तेजना चरम पर है | खबरो के अनुसार खतरनाक हथियारो को हाथो मे लिये संपूर्ण हिंदू बाहूल इस ग्राम के बीचो बीच बने रास्ते से मुहर्रम का जुलूस जाते समय  हठात कुछ दूर पर  ग्रामवासियो के दैनिक इस्तेमाल के लिये गडे एक मात्र ट्यूबवेल को  जुलूस कर्मियो ने मारकर तोड़ दिया |उस इलाके मे जल के एकमात्र साधन की ये दशा देखकर स्थानीय हिंदुओ के अंदर भारी रोश और गुस्सा उत्पन्न हुआ और उनके प्रतिवाद के साथ ही दोनो पक्षो मे वाद- विवाद  शुरू हुआ और अंत तक ये मामला हाथापाई तक आते-आते पुलिस  ने  हस्तक्षेप करके मामले को नियंत्रण मे ले लिया |किंतु अचानक पुलिस को लक्ष्य बनाकर मुस्लिम दुस्कृतियो  के तरफ से ईट पत्तथर की बारिश शुरू कर दी गयी | हमले मे एक पुलिस ऑफिसर( ए एस आइ) गंभीर  रुप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ते है | अंत मे हिंदुओ ने बाध्य होकर कलिग्राम हाई स्कुल के पास वाले रास्ते को अवरोध  करना शुरू किया | फलस्वरुप जुलूस बंद हो जाता है |
स्थानिय लोगो की ये आसंका को देखते हुए  की आत्मघाती हथियारो से लैस मुसलमानो की  जुलूस वापसी के समय उस हिंदू ग्राम पर प्राणघाती हमला कर सकते है |इसिलिये पहले से ही भारी मात्रा मे पुलिस बल और रैफ को इलाके मे उतार कर माहौल को सम्भालने की चेसटा की  गयी|
अंत तक मिले तथ्यो के अनुसार फिर से पुलिस जुलूस को अनुमती नही देना चाहती है| लेकिन  हिंदुओ द्वारा रास्ते का अवरोध अब भी जारी है साथ ही साथ अब तक किसी की गिरफ्तारी भी नही हो पायी है |
उल्लेखनिय है की, उत्तर दिनाजपुर एवं मुर्शिदावाद की तरह ही इन जिलो मे भी हिंदू संख्यालघू हो चुके है | पिछले वर्ष ठिक इसी तरह एक  समय मुहर्रम के कुछ दिन पहले सदस्य संग्रह अभियान मे निकले,इसी कलिग्राम मे  ही ” हिंदू सम्हति” के माननीय सभापती श्री तपन कुमार घोष एवं वर्तमान मे ” नमो मंच ” के संस्थापक प्राणपुरुष श्री असिताभ भौमिक माहासय को मालदा पुलिस ने गिरफतार किया था

हमारे भारत मे बहुत  लोग पाकिस्तानी गायको ,खिलाडीयो और कलाकारो के प्रतिभा के इतने  कायल है और इसी कायलता मे वशिभुत और प्रेमविलीन  होकर पकिस्तानियो के  विरोध के खिलाफ जो इतना विधवा विलाप कर रहे है ,आखिर वो किस आधार पर पकिस्तान की दीर्घकालिन  भारत विरुद्ध सभी गतिविधियो और शत्रुता को भुला बैठे है ? पाकिस्तान के इसी शत्रुता और भारत विरुद्ध आचरण से हमारे देश ,देशवासियो और  इन छ्द्म धर्मनिर्पेक्षवादियो के  रक्षा के लिये न जाने कितने ही  सैनिको ने आज तक अपने प्राणो की आहुति दे दी है कितने ही माँ के गोद उजड़ गये ,बहनो के सिंदूर धूल गये बच्चो के सर पर अनाथ का तमगा लग गया ,उनके बलिदानओ का क्या मोल न था? आखिर इनके लिये उनके बलिदानो को भुला पाना कैसे संभव हो पाया ?
तब तो इसका अर्थ यही समझा जा सकता है कीअगर कोई हमारे देश का दुश्मन भी है,लेकिन अगर  वो अच्छा कलाकार या अच्छा खिलाडी है तो हमारे देश के ये तथाकथित उदारवादी (उजाड़वादी) उनके स्वागत के लिये दंडवत बिछ जायेनगे,उनके चरण धुली को अपने मस्तक पर लगाकर खुद को धन्य करेंगे |
आखिर इनका कलाप्रेम आज देशप्रेम से बढकर हो गया है क्या ?
इस समस्त क्रिया कलाप को सिधे देशद्रोहिता कहना किसी भी तर्क के आधार पर अनुचित कहा जा  सकता है क्या? अगर ये सभी कलाप्रेमि (?) / देशद्रोही कानून को झासा देकर  बच भी जाते है, और जनता अगर इनको उपयुक्त सजा देती है तो जनता को असहिश्नु कहा जायेगा क्या ?
मेरे अनुसार यही असहिश्नुता ही सच्ची देशभक्ति है ,और देश के हितो की रक्षा के लिये हमारे देशभक्त जनता की नजरो मे वांछनिय और समय की माँग है

अपने सम्मान वापिस लौटाने वाले लेखक कौन है

सभी उदाहरण NCERT की 2 साल पुरानी पुस्तकों से हैं.

1-वैदिक काल में विशिष्ट अतिथियों के लिए गोमांस का परोसा जाना सम्मान सूचक माना जाता था।

(कक्षा 6-प्राचीन भारत, पृष्ठ 35, लेखिका-रोमिला थापर)

2-महमूद गजनवी ने मूर्तियों को तोड़ा और इससे वह धार्मिक नेता बन गया।

(कक्षा 7-मध्यकालीन भारत, पृष्ठ 28)

3-1857 का स्वतंत्रता संग्राम एक सैनिक विद्रोह था।

(कक्षा 8-सामाजिक विज्ञान भाग-1, आधुनिक भारत, पृष्ठ 166, लेखक-अर्जुन देव, इन्दिरा अर्जुन देव)

4- महावीर 12 वर्षों तक जहां-तहां भटकते रहे। 12 वर्ष की लम्बी यात्रा के दौरान उन्होंने एक बार भी अपने वस्त्र नहीं बदले। 42 वर्ष की आयु में उन्होंने वस्त्र का एकदम त्याग कर दिया।

(कक्षा 11, प्राचीन भारत, पृष्ठ 101, लेखक-रामशरण शर्मा)

5-जाटों ने, गरीब हो या धनी, जागीरदार हो या किसान, हिन्दू हो या मुसलमान, सबको लूटा।

(कक्षा 12 – आधुनिक भारत, पृष्ठ 18-19, विपिन चन्द्र)

6-रणजीत सिंह अपने सिंहासन से उतरकर मुसलमान फकीरों के पैरों की धूल अपनी लम्बी सफेद दाढ़ी से झाड़ताथा।

(कक्षा 12 -पृष्ठ 20, विपिन चन्द्र)

7-आर्य समाज ने हिन्दुओं, मुसलमानों, पारसियों, सिखों और ईसाइयों के बीच पनप रही राष्ट्रीय एकता को भंग करने का प्रयास किया।

(कक्षा 12-आधुनिक भारत, पृष्ठ 183, लेखक-विपिन चन्द्र)

8-तिलक, अरविन्द घोष, विपिनचन्द्र पाल और लाला लाजपतराय जैसे नेता उग्रवादी तथा आतंकवादी थे

(कक्षा 12-आधुनिक भारत-विपिन चन्द्र, पृष्ठ 208)

9-400 वर्ष ईसा पूर्व अयोध्या का कोई अस्तित्व नहीं था। महाभारत और रामायण कल्पित महाकाव्य हैं।

(कक्षा 11, पृष्ठ 107, मध्यकालीन इतिहास, आर.एस. शर्मा)

10-वीर पृथ्वीराज चौहान मैदान छोड़कर भाग गया और जयचन्द गोरी के खिलाफ युद्धभूमि में लड़ते हुए मारा गया।

(कक्षा 11, मध्यकालीन भारत, प्रो. सतीश चन्द्र)

11-औरंगजेब जिन्दा पीर थे।

(मध्यकालीन भारत, पृष्ठ 316, लेखक-प्रो. सतीश चन्द्र)

12-राम और कृष्ण का कोई अस्तित्व ही नहीं था। वे केवल काल्पनिक कहानियां हैं।

(मध्यकालीन भारत, पृष्ठ 245, रोमिला थापर)

(ऐसे दर्जनों आपत्तिजनक बिन्दु और भी हैं)
इतिहास की किताबों से रोमिला थापर जैसी लेखको ने मुसलमानों द्वारा धर्म के नाम पर काफ़िर हिन्दुओं के ऊपर किये गये भयानक अत्याचारों को गायब कर दिया है. नकली धर्मनिरपेक्षतावादी नेताओं की शह पर झूठा इतिहास लिखकर एक समुदाय की हिंसक मानसिकता पर जानबूझकर पर्दा ड़ाला जा रहा है. इन भयानक अत्याचारों को सदियों से चली आ रही गंगा जमुनी संस्कृति, अनेकता में एकता और धार्मिक सहिष्णुता बताकर नौजवान पीढ़ी को धोखा दिया जा रहा है. उन्हें अंधकार में रखा जा रहा है. भविष्य में इसका परिणाम बहुत खतरनाक होगा क्योकि नयी पीढ़ी ऐसे मुसलमानों की मानसिकता न जानने के कारण उनसे असावधान रहेगी और खतरे में पड़ जायेगी.
सोचने का विषय है कि आखिर किसके दबाव में सत्य को छिपाया अथवा तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है????

धर्म-निरपेक्षता के नाम पर हिंदुओं के साथ अन्याय कब तक?

पढ़े और खुद विचार करें….!
1. विश्व में लगभग 56 मुस्लिम देश हैं, एक भी हज के लिये “सब्सिडी” नही देता और न किसी देश में हिन्दुओं के लिये विशेष कानून है जैसे भारत में मुसलमानों के लिये ।
2. किसी भी देश का नाम बताइये जहाँ 85% बहुसंख्यक को याचना करनी पड़ती है 15% अल्पसंख्यकों को संतुष्ट करने के लिए।
3. किसी भी मुस्लिम देश का राष्ट्रपति और प्रधानमन्त्री गैर- मुस्लिम नही ।
4. किसी “मुल्ला” या “मौलवी”ने आतंकवादियों के खिलाफ़ फ़तवा नही किया आज तक।
5. महाराष्ट्र, बिहार, केरल जैसे हिन्दू बहुल राज्यों में मुख्यमन्त्री मुस्लिम हो चुके हैं, “कश्मीर” में कोई हिन्दू क्यों नही ?
6. 1947 में पाकिस्तान में हिन्दू जनसंख्या 24% थी, अब 1% रह गई है, उसी समय तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब आज का अहसान फ़रामोश बांग्लादेश) में हिन्दू जनसंख्या 30% थी जो अब 7% से भी कम हो गई है ।
क्या हुआ गुमशुदा हिन्दुओं का ? क्या वहाँ और यहाँ कहीँ भी हिन्दुओं का कोई मानवाधिकार हैं ?
जबकि इस दौरान भारत में मुस्लिम जनसंख्या 10.4% से बढकर 14.2% हो गई है, क्या वास्तव में हिन्दू कट्टरवादी है?
7. यदि हिन्दू असहिष्णु हैं तो कैसे हमारे यहाँ मुस्लिम सड़को पर नमाज पढ़ते है, लाऊडस्पीकर पर दिन-भर चिल्लाते रहते हैं कि “अल्लाह के सिवाय और कोई शक्ति नहीं है” ?
8. गांधीजी – “सोमनाथ मन्दिर के जीर्णोद्धार के लिये देश के पैसे का दुरुपयोग नहीं होना चाहिये”।
लेकिन 1948 में ही दिल्ली की मस्जिदों को सरकारी मदद से बनवाने के लिए नेहरू और पटेल पर दबाव बनाया गया, क्यों???
9. कश्मीर, नागालैण्ड, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय आदि में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं, क्या उन्हें कोई विशेष सुविधा मिलती है ?
10. हज के लिये “सब्सिडी” मिलती है, जबकि मानसरोवर और अमरनाथ जाने पर टैक्स देना पड़ता है, क्यों ???
11. मदरसे और क्रिश्चियन स्कूलों में बाईबल और कुरान पढ़ा सकते हैं, तो फिर सरस्वती शिशु मन्दिरों में और बाकि स्कूलों में “श्रीमद्भगवतगीता” क्यों नहीं पढ़ाई जा सकती?
14. गोधरा के बाद मीडिया में जो हंगामा हुआ वैसा हंगामा कश्मीर के चार लाख हिन्दुओं की मौत पर क्यों नही हुआ ?