दुर्गा शक्ति ने जिस दीवार को गिराया था, अब वहां मस्जिद

कादलपुर (ग्रेटर नोएडा)
सरकारी जमीन पर जिस अवैध दीवार को गिराकर आईएएस ऑफिसर दुर्गा शक्ति नागपाल को निलंबन का सामना करना पड़ा था, वहां आखिरकार एक मस्जिद बनकर तैयार हो गई है। 27 जुलाई 2013 को गौतमबुद्धनगर (सदर) तहसील की तत्कालनी एसडीएम दुर्गा शक्ति नागपाल के आदेश पर सरकारी जमीन पर बन रही अवैध दीवार को गिरा दिया गया था।

1आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल की यह कार्रवाई उनके निलंबन का कारण बनी थी। दुर्गा शक्ति के इस आदेश को सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश माना गया था। अब एक साल बाद उसी सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से एक मस्जिद का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। इसे सिर्फ प्लास्टर और रंग रोगन की जरूरत है।

 हालांकि, जब जिला प्रशासन से इस बारे में बात की गई तो उसने ऐसे किसी भी निर्माण के बारे में जानकारी होने से ही इनकार कर दिया। गौतमबुद्धनगर के डीएम एवी राजमौली ने कहा, ‘कादलपुर गांव में मस्जिद का निर्माण सरकारी इजाजत से हुआ है या नहीं, इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है।’

कादलपुर गांव गौतमबुद्ध नगर के सदर क्षेत्र में आता है। एसडीएम (सदर) बच्चू सिंह ने कहा, ‘मुझे पता चला है कि कादलपुर गांव में मस्जिद का निर्माण मेरी नियुक्ति से 10 महीने पहले हो चुका था, लेकिन मैं जल्द ही वहां जाकर तथ्यों की जांच करूंगा।’

निलंबन के वक्त दुर्गा भी एसडीएम (सदर) के पद पर ही तैनात थीं। फरवरी से जुलाई के बीच दुर्गा ने रेत माफिया के खिलाफ अभियान चलाया। नोएडा पुलिस को साथ लेकर की गई इस कार्रवाई में 66 FIR दर्ज हुईं, 104 लोग गिरफ्तार किए गए और 81 गाड़ियों को जब्त किया गया। हालांकि यह कार्रवाई अधिक दिन तक जारी नहीं रह सकी।

इस बीच, समाजवादी पार्टी के नेता नरेंद्र भाटी का एक विडियो भी सामने आया। टीवी फुटेज में भाटी एक सभा को संबोधित करते हुए कह रहे थे कि उन्हीं की कोशिश पर दुर्गा शक्ति का निलंबन हो सका। उन्होंने 41 मिनट में दुर्गा शक्ति को निलंबित करवा दिया। भाटी बाद में गौतमबुद्ध नगर सीट से एसपी के लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार भी बने।

इस पूरे मामले को भरपूर मीडिया कवरेज मिली लेकिन अखिलेश सरकार अपने फैसले पर अंत तक अडिग रही। यूपी सरकार ने दुर्गा शक्ति को 4 अगस्त के दिन चार्जशीट थमा दी।

दुर्गा शक्ति का निलंबन 22 सितंबर को ही हट सका। इससे एक दिन पहले उन्होंने अपने पति के साथ सीएम अखिलेश से मुलाकात की। कुछ दिन बाद उनकी नियुक्ति जॉइंट मैजिस्ट्रेट, कानपुर देहात के पद पर हुई और फिर इस साल मार्च में मुख्य विकास अधिकारी बनाकर उन्हें मथुरा भेज दिया गया। 12 जुलाई को उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए हरी झंडी मिल गई। अभी वह पोस्टिंग का इंतजार कर रही हैं।

इन सबके बीच, ग्रेटर नोएडा फिर वहीं पहुंच गया जहां दुर्गा शक्ति ने उसे रोका था। इलाके में खनन माफिया एक बार फिर से सक्रिय हो उठा और जिला प्रशासन की जानकारी के बिना ही एक मस्जिद अस्तित्व आ गई।

मस्जिद के मौलवी हाफिज आस मोहम्मद कहते हैं कि हम सभी जिम्मेदार नागरिक हैं और आपसी सद्भाव से रहते हैं। दीवार गिराए जाने के बाद सांप्रदायिक तनाव अवश्य था लेकिन सभी गांववालों का व्यवहार जिम्मेदारी से भरा रहा। हम सभी सिर्फ विकास चाहते हैं।

अहम बात यह है कि मस्जिद का निर्माण दुर्गा शक्ति नागपाल की नियुक्ति के दौरान ही शुरू नहीं हुआ था। स्थानीय लोग बताते हैं कि वे साल 2008 से ही इसे बनाने की कोशिश में थे लेकिन उनके पास समुचित धन नहीं था। इस बीच, दुर्गा शक्ति नागपाल की कार्रवाई ने इस मामले को सुर्खियों में ला दिया। इससे हर तरफ से मस्जिद के लिए धन मिलने लगा और निर्माण जल्दी संभव हो सका।

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5 सालों में कितने ‘गैरकानूनी बांग्लादेशी’ आए, जानते हैं ?

दिल्ली में डॉक्टर नारंग की हत्या के बाद मामले ने अलग ही रंग ले लिया। सोशल मीडिया पर भी यह बात जोरों-शोरों से उठाई गई कि जिन लोगों ने डॉ.नारंग की जान ली है वह बांग्लादेशी मुस्लिम हैं। पुलिस ने अपनी सफाई में बताया कि वे लोग यूपी के थे बांग्लादेश के नहीं। फिर भी लोग इसे सच नहीं मान रहे। ऐसे में एक बांग्लादेश के लोगों से जुड़ा हुआ एक पुराना आंकड़ा सामने आया है।

साल 2012 के इस आंकड़े को लोग ट्वीटर पर #IllegalBangladeshiMuslims हैशटैग पर शेयर कर रहे हैं। इसमें बताया गया है कि 2012 से पिछले पांच सालों में राजधानी दिल्ली के अंदर 7 हजार से ज्यादा बांग्लादेशी लोग घुसे।TOI की इस रिपोर्ट के मुताबिक, ये सब लोग गैरकानूनी तरीके से घुसे थे जिन्हें अलग-अलग वक्त पर गिरफ्तार किया जाता रहा।