हमारे दलित भाइयों को भी यह समझना आवश्यक है कि उनके साथ कितना बड़ा गेम चल रहा है

Re-development पता है? पुनर्विकास जिसे कहते हैं? पुराना घर तुड़वाकर नया घर बनाना ? शहरों में धड़ल्ले से चल रहा है क्योंकि खाली जगहें बस की बात नहीं होती ।

इस पोस्ट से इसका संबंध पूरा स्पष्ट हो जाएगा, बस धैर्य से पढ़िये । दो मिनट भी नहीं लगेंगे, बात स्पष्ट हो जाएगी । 66 साल का खेल है, दो मिनट तो देंगे आप?

तो मित्रों होता यह है:

आप का घर है । पुराना है, जैसा भी है फिर भी आप का अपना है । लेकिन अक्सर होता यह है कि मनुष्य हमेशा जो उसके पास है उससे असंतुष्ट रहता है । सभी की यही बात है, कोई धर्म या समाज अपवाद नहीं होते ।

तो आप भी अपने घर से धीरे धीरे असंतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन नया बड़ा घर बस की बात नहीं होती । इस वक़्त कोई बिल्डर या बिल्डर का आदमी आप से संपर्क करता है । आप के असंतोष को हवा देता है । आप को यह भी बताता है कि आप को नया घर मिलेगा । है उस से जगह भी बड़ी मिलेगी । ऊपर से पैसे भी मिलेंगे । बस आप अपनी कॉलोनी के भी लोगों को राजी कर लीजिये । आप सब के घर जिसपर खड़े हैं वो कॉलोनी की जमीन बिल्डर को दे दीजिये । वो लिखित एग्रीमंट करेगा । नयी कॉलोनी बनेगी उसमें आप को नया, बड़ा घर और ऊपर से पैसे भी मिलेंगे । बिल्डर उसी जगह पर नयी कॉलोनी में कुछ नए घर बाँधेगा, उन्हें बेचेगा उसमें कमाएगा उसमें ही आप के लिए नए बड़े घर बना देगा । रहने को भी मुफ्त होगा । कोई मेंटेनन्स चार्ज नहीं ।

जब तक वो नए घर बांध रहा है, आप को अन्यत्र रहने के लिए या तो पर्यायी जगह देगा या फिर उतने समय के लिए तय रकम हर महीने देगा अग्रिम चेक से । अक्सर यही होगा कि चेक मिलेंगे । समय भी तय होगा इतने महिने या वर्ष + महिने के अग्रिम चेक आप के हाथ में थमाए जाएँगे । कोई समस्या नही, खुश?

समस्या होनी नहीं चाहिए, मगर होती है । जगह चली जाती है और बिल्डर के चेक दो तीन महीनों बाद बाउन्स होने लगते हैं । बिल्डर भी हाथ ऊपर कर देता है कि उसने सोचा था कि वो कमाएगा और कोई प्रोब्लेम नहीं आयेगा लेकीन वो ही कमा नहीं पाया है । आप शांति से घर जाएँगे तो उसे आप के लिए हमदर्दी होगी, आप तमाशा करेंगे तो उसके पास गुंडे भी होंगे ।

एक और प्रकार भी होता है । घर खरीदते वक़्त सब कहते हैं कि टाइटल क्लियर देख कर लीजिये । जो जगह आप को बेच रहा है वो जगह का मालिक है या नहीं और आप को बेचने को उसे अधिकार है या नहीं यह देख लीजिये । लेकिन कई केसेस सुनने में आते हैं कि पूंजी फूंककर, रहता घर बेच कर लोग नया घर उससे खरीदते हैं जो जगह का मालिक है ही नहीं । घर खाली करने की नौबत आती है तब कोई साथ नहीं होता, दयनीय स्थिति होती है । कभी कभी कोई राजनेता आप की दुर्दशा के बल पर कुछ टीआरपी हासिल कर लेता है लेकिन आखिर आप को खुद ही हालात का हल निकालना होता है ।

इन दोनों परिस्थितियों में आप को पता है कि परिस्थिति बहुत बुरी ही होगी ।

इस पोस्ट से यह स्पष्टीकरण का संबंध यही है कि हिन्दू से ईसाई या मुसलमान हुए दलित का बिलकुल यही हाल है । उसे अपने परिस्थिति से घृणा करने को सिखाया गया । धर्म के प्रति घृणा करने को सिखाया गया । सिखाया गया कि अगर वो हिन्दू है तो वो दलित है – टूटा, कुचला हुआ, जिसका दलन हुआ हो । आइये भाई, आइये ब्रदर, मुसलमान बनिए, ईसाई बनिए, तरक्की करिए, बराबरी करिए उनसे जो आप को नीचा दिखाते थे ।
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क्या आप को पता है कि संविधान के तीसरे अनुच्छेद (अनुसूचित जाती) आदेश 1950 के अनुसार केवल हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति अनुसूचित जाती का दर्जा प्राप्त नहीं कर सकते ।

एडिट: ध्यान रहे कि यह आदेश 1950 का है, और डॉ अंबेडकर का निधन 1956 में हुआ । यह उनके निधन के बाद किया हुआ सुधार नहीं ।
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दर्जा यानि यहाँ संबंध सुविधाओं से है । आरक्षण से है । केवल हिन्दू को है । कानून स्पष्ट है । 1950 से ही है । याने इतने साल ये बिना क्लियर टाइटल के घर बेचते रहे । बिना क्लियर टाइटल के घर बेचना जुर्म है, लेकिन इनहोने तो जिंदगियों का नीलाम फूंका है ।

1950 से हिन्दू दलितों को, ये सब्जबाग दिखाते रहे । शायद शुरुवाती दिनों में निभा पाये हों । अब इनके आत्माओं की फसल काटने के (soul harvesting) टार्गेट्स होते है । अब ये दलितों को कुछ दे नहीं पाते, लेकिन उन्हें के बीच इन्हें काम भी करना होता है । वही दलितों का भेड़ जैसा उपयोग कर के अन्य दलितों को खड्डे में गिराना है । इसलिए इनहोने एक नया राग छेड़ा है ।

सेक्युलर भारत में ईसाई मुस्लिम दलितों पर अन्याय का राग आलाप रहे हैं । कह रहे है कि यह काला कानून है, उसे खारिज कर दीजिये । लाखों दलितों को हिन्दू दलितों के समकक्ष आरक्षण देने की मांग है । अगर एक हिन्दू SC जाती को जो लाभ मिल रहे हैं उसमें ईसाई या मुस्लिम हिस्सा हड़पने की मांग कर रहे हैं, कि हम भी उस जाती के हैं ।

क्या भूल गए कि उस जाती छोड़ने के लिए ही आप ने या आप के पूर्वजों ने धर्मांतरण किया था ? हिन्दू और धर्म के नाम गालियां भी दी थी और आज भी दे रहे हैं ? आज आप के साथ धोखा हुआ है इसलिए आप को जिस आका ने धोखा दिया वो आप को नया झूठ सिखा रहा है ।

मिस्टर फ्री का कुछ ऐसा ही था ना? मोदी जी से पैसे देंगे तो हम फ्री दे सकेंगे? मोदी जी पैसे नहीं दे रहे हैं जी, वे आप का भला नहीं चाहते जी, हम को काम नही करने देते जी…..

या फिर दूसरा उदाहरण प्रेम में फंसाकर घर से भगाई लड़की का, उसको गर्भवती करो या बच्चा भी पैदा करो फिर बाप से पैसे मांगने भेजो … ? उसके लिए घर रहना मुश्किल करो …..

यह भी हो रहा है । कुछ ईसाई संघटनों ने खुलकर आरोप लगाया है कि चर्च के पास अपना साम्राज्य बढ़ाने के लिए पैसे हैं लेकिन गरीब दलित इसाइयों के हालात सुधारने की इनको पड़ी नहीं है । यह भी खुलकर कहा है कि हम से तो हिन्दू दलितों की अवस्था अच्छी है । आज उनको दलित होने की वजह से वहाँ भी तरक्की नहीं मिल रही । पादरी बनने की पढ़ाई तो की लेकिन चर्च वाले पादरी बना नहीं रहे हैं । या कोई दलित पादरी हैं जिन्हें दलित होने के कारण प्रताड़ना का अनुभव करना पड रहा है।

कुल मिलाकर बात ये है कि तिलमिला रहे हैं धर्मांतरण के कारण । लेकिन आज वे शत्रु के सैनिक हैं और शत्रु आज भी उन्हें हमसे लूटने के कारण ही इस्तेमाल कर रहा है ।

आज हिन्दू दलित जो लाभ पा रहा है उससे उसको बेदखल करने यह ईसाई कसाई सेना आ रही है । भारत का भाग्य है माता रोम की कॉंग्रेस सत्ता पर नहीं है नहीं तो वो यह कर डालती ।

जाते जाते एक बात । आप को कई ईसाई मिलेंगे जिनके नाम से पता ही नहीं चलेगा कि वे ईसाई है । क्या कारण है कि इनहोने हिन्दू नाम रखे हैं ? क्या आप को निश्चित पता है कि वे हमारे कोई हिन्दू दलित भाई के लाभ को हड़प नहीं रहे? वैसे यूं करना कानूनन अपराध है, सो अगर आप यह तहक़ीक़ात कर के उसकी पुलिस में शिकायत कराते हैं तो एक हिन्दू दलित भाई बहन का हक बचाने का पुण्य भी आप को मिलेगा ।

चलिये, लंबी हो गई पोस्ट, पूरी पढ़ने का आभार । अगर आप ने नोटिस किया होगा तो मैंने एक भी प्रूफ नहीं दिया है यहाँ । और आप को यह भी पता ही होगा कि बिना प्रूफ के मैं बोलता नहीं । सभी सुरक्शित रखे हैं, देखते हैं कोई इस बात को चैलेंज करने की हिम्मत करता है तो ।

आप से अनुरोध है कि इसे कॉपी पेस्ट ही करें । मेरा नाम भी दे दें, ताकि जो भी बहस करने आए, मेरे पास आए, आप का सिर न खाये । हाँ, लेकिन इसे फैलाइएगा जरूर, हमारे दलित भाइयों को भी यह समझना आवश्यक है कि उनके साथ कितना बड़ा गेम किया है ईसाई कसाई ने । यह फैलाना भी अपनी युद्ध नीति ही है ।

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