आखिरकार शिबू राजबंशी को जमानत मिल ही गई। हिंदू संहति के अथक प्रयास सफल हुए।

 हिंदू संहति के सक्रिय कार्यकर्ता शिबू राजबंशी पूर्वी बर्दवान (पश्चिम बंगाल) में समुद्रगढ़ रेलवे स्टेशन से सटे टोटो स्टैंड पर एक टोटो चालक है।जब से   चुनाव परिणाम घोषित किए गए हैं तब से ही  यूनियन द्वारा उन्हें अपना टोटो चलाने या यात्रियों को लेने की अनुमति नहीं दी गयी  ।  1 जुलाई को, यूनियन नेता अभिजीत मिस्त्री ने स्टेशन से लगभग एक किलोमीटर दूर गोआलपारा चौराहे पर यात्रियों को ले जाने के दौरान शिबू को अपमानित किया, उनके साथ गाली-गलौच की।  उन्होंने यह  धमकी भी दी कि शिबू को किसी भी हालत में यात्रियों को ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।  दोनों में कहासुनी और फिर हाथापाई होने  लगी।

एक समय के प्रभावशाली कांग्रेसी नेता #शौकतखान के दो भतीजे बबला खान और मिठू खान, अभिजीत मिस्त्री की ओर से यह सोचकर लड़ने आए कि उन्हें हिंदू संहति के कार्यकर्ता शिबू को पीटने का मौका मिल गया है। अकेले शिबू से एक साथ तीनों भिड़ गए। लेकिन सप्ताह में एक बार सूअर का मांस खाने वाले शिबू की शारीरिक बल के आगे उन तीनों की एक न चली। टोटो यूनियन के एक अन्य नेता बीरेन घरामी ने उन तीनों की ओर से पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई कि शिबू ने उन्हें बुरी तरह पीटा है। 9 जुलाई को जानबूझकर मेडिकल रिपोर्ट जमा नहीं की गई ! #नादनघाट पुलिस द्वारा 16 जुलाई को कालना कोर्ट में पेश की गई चोट की रिपोर्ट में कहा गया है कि शिबू की अत्यधिक पिटाई से यूनियन नेता अभिजीत मिस्त्री के सिर में चोट लगी थी और उनके पैर की हड्डी भी टूट गई थी । 1 जुलाई को शिबू की गिरफ्तारी की खबर मिलने पर हिंदू संहति के अध्यक्ष #देबतनुभट्टाचार्य ने कहा कि हिंदू संहति शिबू की जमानत के लिए सभी आवश्यक कानूनी कदम उठाएगी। साथ ही जमानत मिलने तक हिंदू संहति शिबू के परिवार का सारा खर्च भी वहन करेगी। हिंदू संहति द्वारा कालना कोर्ट के वरिष्ठतम वकील गौतम गोस्वामी की नियुक्ति की गई । 1,9,16 जुलाई – इन तीनों दिन पुलिस कोर्ट में शिबू की जमानत की अर्जी खारिज कर दी गई। गौतम बाबू को पुलिस कोर्ट की अगली तारीख का इंतजार किए बिना जज कोर्ट में आवेदन करने को कहा गया। इसी के तहत इस महीने की 23 तारीख को वहां सुनवाई हुई थी। लेकिन उस दिन समुद्रगढ़ में एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। इसलिए पुलिस की ओर से चोट रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं की जा सकी। हिंदू संहति निराश नहीं हुई। कोलकाता से आए केंद्रीय स्तर के कार्यकर्ता कालना कोर्ट और समुद्रगढ़ में शिबू के परिवार के संपर्क में रहे । अगली सुनवाई 26 जुलाई यानी आज होनी थी। आखिरकार आज सफलता मिली । शिबू राजबंशी को जमानत मिल गई है। जेल से छूटने के साथ ही संगठन की ओर से फूलों की माला पहनाकर उनका अभिनंदन किया गया। संगठन के कार्यकर्ता भी उनके घर पहुंचे और बधाई दी। हम आज संतुष्ट हैं, खुश हैं।

हिंदू संहति के अध्यक्ष, देबतनु भट्टाचार्य ने बाउरी समुदाय के प्रभावशाली लोगों को पत्र लिखकर उनसे एक मुस्लिम लड़की से शादी करने वाले शंकु चालक के परिवार के सामाजिक बहिष्कार के फैसले को वापस लेने का आग्रह किया।

कल हमने सोशल मीडिया पर बाउरी समुदाय (जो हिंदू समाज का एक अभिन्न अंग है) की एक घटना के बारे में पोस्ट किया था। तकरीबन ढाई साल पहले रेहाना खातून ने पश्चिम मिदनापुर जिलांतर्गत (पश्चिम बंगाल) बेनिसुली क्षेत्र के नयाग्राम निवासी रवींद्रनाथ चालक के बेटे शंकु चालक से स्वेच्छा से शादी की थी।
वह पड़ोस के ही गांव की है। शादी के बाद वह अपनी पारंपरिक हिंदू जड़ों की ओर लौट आई(हिंदू धर्म में घर वापसी कर ली) । शंकु के परिवारवालों ने भी उसे अपने परिवार में एक हिंदू गृहिणी के रूप में स्वीकार कर लिया है। पिछले कुछ दिनों से कुछ हिंदू विरोधी शक्तियों ने इस विवाह के खिलाफ अभियान चलाना शुरू कर दिया । उन्होंने शंकु के परिवार और उनके रिश्तेदारों के 9 अन्य परिवारों के सामाजिक बहिष्कार का आह्वान किया।
हिंदू संहति ने बहिष्कार का कड़ा विरोध किया है। हमें लगता है कि शंकु का प्रयास सराहनीय है। हिंदू संहति के अध्यक्ष देबतनु भट्टाचार्य ने सामाजिक बहिष्कार की घोषणा के बाद शंकु की ओर सहयोग का हाथ बढ़ाने के अपने निर्णय की घोषणा की। हिंदू संहति के दो महासचिव सागर हालदर और मुकुंद कोले कल मिदनापुर पहुंचे‌। हिंदू संहति के एक प्रमुख स्थानीय कार्यकर्ता प्रोसेनजीत दास के साथ, वे शंकु और उनकी पत्नी से मिले। उन्होंने उन्हें आवश्यक राहत प्रदान की। वे उनका साथ देने का संदेश लेकर आए थे।
आज हिन्दू संहति के अध्यक्ष देबतनु भट्टाचार्य ने बाउरी समाज कल्याण समिति (पश्चिम बंगाल) के अध्यक्ष और समुदाय के अन्य प्रभावशाली सदस्यों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल विधान सभा के बाउरी समाज और अन्य अनुसुचित जाति के सदस्यों को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने का निवेदन किया। पत्र में उन्होंने आशा व्यक्त की कि उनके हस्तक्षेप से सामाजिक बहिष्कार समाप्त हो जाएगा और बाउरी समाज सम्मानपूर्वक शंकु बाउरी और उनकी पत्नी को स्वीकार करेगा।

पुलिस की भूमिका कितनी भी नकारात्मक, घृणास्पद क्यों न हो, हिंदू संहति के कार्यकर्ताओं का मनोबल नहीं तोड़ पाएगी।

1 जुलाई को, समुद्रगढ़ रेलवे स्टेशन से सटे टोटो स्टैंड पर टोटो यूनियन के सह सचिव अभिजीत मिस्त्री, हिंदू संहति के जुझारू कार्यकर्ता(समुद्रगढ़ क्षेत्र के) और उक्त टोटो स्टैंड पर टोटो चालकों में से एक शिबु राजबंशी के साथ भिड़ गए। लड़ाई के दौरान, एक समय के कांग्रेस नेता शौकत ख़ान के दो भतीजे बबला खान और मिठू खान, यूनियन के नेता की ओर से शिबू पर हमला कर दिया। यानी हिंदू संहति के एक कार्यकर्ता के खिलाफ लड़ाई में दूसरी तरफ तीन जने ! तब भी वे इसका फायदा नहीं उठा सके। उनकी ओर से टोटो यूनियन के एक अन्य नेता बीरेन घरामी ने लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि शिबु ने तीनों को बुरी तरह पीटा । पुलिस तुरंत ही अति सक्रिय होकर शिबु की तलाश शुरू कर दी और आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया।

हिंदू संहति के अध्यक्ष देबतनु भट्टाचार्य ने उसी दिन एक स्पष्ट संदेश भेजा कि संगठन शिबु राजबंशी और उनके परिवार के साथ खड़ा होगा। संगठन ने वरिष्ठ वकीलों को भी नियुक्त किया है। शिबु का बचाव करने हेतु जाने-माने वरिष्ठ वकील गौतम गोस्वामी को कालना कोर्ट में नियुक्त किया गया । न्यायाधीश ने 2 जुलाई को शिबु को हिरासत में भेज दिया। 9 जुलाई को पुलिस ने जानबूझकर चोट की रिपोर्ट नहीं दी,जिसके चलते शिबु को जमानत नहीं मिली । पुलिस ने आज कोर्ट को चोट की रिपोर्ट सौंपी। इसमें उल्लेख है कि शिबु की अत्यधिक पिटाई से यूनियन नेता के पैर की हड्डी टूट गई । सिर भी बुरी तरह जख्मी हो गया। सात दिन बाद भी पुलिस चोटों की गंभीरता का खुलासा नहीं कर सकी। 14 दिनों के बाद ही आघात रिपोर्ट सौंप पाई। जिस न्यायाधीश के समक्ष मामला दायर किया गया था वह आज उपस्थित नहीं था।

कम से कम जज ने मामले की सुनवाई तो की।

हिंदू संहति के वकील के कड़े सवालों के बावजूद, चोट की रिपोर्ट के कारण जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।
16/07/20 को संगठन के केंद्रीय महासचिव श्री सागर हलदर के नेतृत्व में हिंदू संहति के चार केंद्रीय कार्यकर्ता कालना कोर्ट पहुंचे। जमानत खारिज होने के बाद उन्होंने वकील से जल्द से जल्द जिला अदालत में जमानत के लिए आवेदन करने को कहा। वहीं, शिबु राजबंशी की मां, पत्नी, अदालत परिसर में मौजूद अन्य रिश्तेदारों और समुद्रगढ़ में मौजूद हिंदू संहति के कार्यकर्ताओं ने कहा कि उन्हें शिबु की गतिविधियों पर गर्व है। हमने हिंदू संहति की ओर से उनके परिवार की जरूरतों और कानूनी सहायता का पूरा ख्याल रखा और भविष्य में भी ऐसा करते रहेंगे। चिंता करने का कोई कारण नहीं है। हिंदू संहति शिबु राजबंशी और उनके परिवार के साथ है और हमेशा उनके साथ रहेगी।

बंद करो गौ-हत्या – मांग करती है हिंदू संहति

जबकि असम में भाजपा सरकार ने हाल ही में राज्य भर में गोहत्या को रोकने की पहल की, पश्चिम बंगाल में इस मुद्दे पर राज्य सरकार की उदासीनता देखी जा सकती है। ऐसा अति दक्षिणपंथी संगठन हिंदू संहति का आरोप है।

पश्चिम बंगाल में हिंदुओं के मानवाधिकारों के लिए मुखर इस लोकप्रिय संगठन के उपाध्यक्ष शांतनु सिंह ने असम में गोहत्या को रोकने के लिए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा के कदम को एक “साहसिक अध्याय” बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि वह पश्चिम बंगाल में जिहादी शक्तियों के तेजी से फलने-फूलने को लेकर चिंतित हैं।
दोनों राज्यों की स्थिति का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए शांतनु सिंह ने कहा कि कभी असम में बंगालियों से नफरत की जाती थी लेकिन अब असमिया समाज समझ गया है कि बंगाली हिंदू हैं इसलिए उनसे डरने की कोई बात नहीं और डर का वास्तविक कारण तो भारत विरोधी घुसपैठिए मुसलमान है।
सिंह जी ने कहा कि चिंता का कारण समग्र स्थिति और पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की उदासीनता है।
“असम के हिंदुओं ने प्रर्दशित किया कि वे क्या चाहते हैं, जबकि कुछ साल पहले तक, असम की स्थिति विकट थी। असम में स्थिति पश्चिम बंगाल की तुलना में बदतर थी। लेकिन ऐसा नहीं है किसी अलौकिक शक्ति विशेष या दैवी शक्ति के चलते असम की स्थिति मौलिक रूप से बदल गई हो, बल्कि जिहादी शक्तियों के हिंदुओं की सामूहिक इच्छाशक्ति के आगे झुक जाने की वजह से ही यह संभव हुआ है। पेट्रो-डॉलर (अरब देशों से प्राप्त धन ) पर पनपने वाले बदरुद्दीन अजमल सांप्रदायिक राजनीति के रसातल में डूब गए हैं।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में तस्वीर बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि यहां के हिंदू जिहादी ताकतों के प्रति उदासीन रहे हैं। इसलिए ये अपवित्र ताकतें उन्हें (हिंदुओं को) रौंद रही हैं और अपनी संस्कृति को लेकर उछल-कूद रही हैं,उत्पात मचा रही हैं।
“किसी भी सभ्य देश में गायों को कहीं भी, जहां तहां वध करते नहीं देखा जाता है। जॉर्डन जैसे देश में, जो पहले एक ईसाई देश हुआ करता था और बाद में जहां इस्लामी राष्ट्र कायम हुआ , वहां एक मुर्गे तक का भी वध सिर्फ़ बूचड़खाने में ही किया जाता है। वहां प्रशासन की सहमति के बिना पशु वध प्रतिबंधित है। यदि यह (पशु-हत्या पर प्रतिबंध) एक मुस्लिम देश में किया जा सकता है, तो भारत में गोहत्या पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए? शांतनु बाबू ने सवाल उठाया।
उन्होंने कहा, “ईद के दौरान हर जगह धीरे-धीरे मरने वाली गायों के कटे गले और जहां तहां खून ही ख़ून – वास्तव में ही बहुत दर्दनाक दृश्य होते हैं और ऐसे दृश्य मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक होते हैं। क्या इसका मतलब सभ्यता के प्रगतिशील युग का मध्ययुगीन रीति-रिवाजों की चपेट में आ जाना नहीं है ? एक सभ्य देश का प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। सिर्फ असम में ही क्यों? क्या पश्चिम बंगाल में कोई हिंदू नहीं है? इसीलिए हिंदू संहति मांग करती है कि पश्चिम बंगाल के सभी हिस्सों में गोहत्या पर फ़ौरन प्रतिबंध लगाया जाए।”

हिंदू संहति के संस्थापक स्वर्गीय तपन घोष जी का स्मरणोत्सव

आज संस्था के संस्थापक स्वर्गीय तपन घोष जी को हिन्दू संहति की ओर से सम्मान के साथ याद किया गया। विभिन्न स्थानों में संगठन के कार्यकर्ताओं ने उनके आदर्शों और कार्य नैतिकत्व के बारे में गंभीर चर्चा के माध्यम से उन्हें याद किया और तपन दा के चित्र पर माल्यार्पण किया तथा पुष्प अर्पित की। हिन्दू संहति की केन्द्रीय समिति के पदाधिकारियों ने शाम 7 बजे से हिन्दू संहति (जादवपुर) के मुख्य कार्यालय में तपन दा की स्मृति में आयोजित एक गोष्ठी में भाग लिया। संगठन की शुरुआत से ही तपन घोष जी ने बंगाल के हिंदू समाज को संदेश दिया कि यह रास्ता संघर्ष का रास्ता है – जिहादी आक्रमण के खिलाफ प्रतिरोध का रास्ता। संगठन के गठन के पहले वर्ष में ही, दक्षिण 24 परगना (पश्चिम बंगाल) के गंगासागर में प्रथम कार्यकारिणी की बैठक के दौरान जिहादी ताकतों के साथ भीषण संघर्ष हुआ और जिसके अपरिहार्य परिणामस्वरूप कार्यकर्ताओं को जेल, अदालत आदि मुसीबतें भी झेलनी पड़ीं। वर्तमान हिंदू संहति के केंद्रीय महासचिवों में से एक सुंदर गोपाल दास, जो उस समय तपन दा के साथ जेल में थे, ने घटना का विस्तृत विवरण दिया। हिंदू संहति के केंद्रीय सह अध्यक्षों में से एक डॉ अभिषेक बनर्जी ने अपने स्वयं के अनुभवों से तपन घोष जी के जीवन का सुखद विवरण दिया कि – उनके दिल में संगठन के सभी कार्यकर्ताओं के लिए अपार स्नेह था और उन्होंने सभी का मार्गदर्शन करने का प्रयास किया। सभी को सही दिशा दिखायी ‌। हिंदू संहति के केंद्रीय सह-अध्यक्ष, प्रख्यात वकील शांतनु सिंह ने बंगाल में हिंदू हितों के लिए तपन घोष जी के योगदान का एक परिपूर्ण तस्वीर पेश की, जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। तपन घोष जी की कहीं बातें , जैसे कि – “माटी कारो बापेर नोय, दापेर”, यानी”भूमि किसी के बाप या दादाओं-परदादाओं की नहीं होती, बल्कि उनकी होती है जो पराक्रमी हैं” (दूसरे शब्दों में, जमीन या स्वभूमि का अधिकार विरासत में नहीं मिलता, भूमि छीन लेनी पड़ती है अर्थात जिसकी लाठी उसकी जमीन), “यदि तुम एक जानवर हो, तो हम भूखे शिकारी हैं” आदि – वक्ताओं के भाषणों में बार-बार गूंजती रहीं।। फेसबुक लाइव पर इस कार्यक्रम की मेजबानी हिंदू संहति के केंद्रीय महासचिवों में से एक रजत राय ने की । कार्यक्रम का समापन जनता को एक स्पष्ट संदेश के साथ हुआ कि हिंदू संहति तपन घोष जी के अधूरे काम को उनके बताए उपायों-दिशानिर्देशों से ही पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

आजकल केरल में मुस्लिम जनसंख्या विस्फोट से सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि ईसाई भी डरे हुए हैं। लिहाज़ा ‘लव जिहाद’ से डरा हुआ ‘चर्च’ ईसाई लड़कियों को इस खतरे से बचाने के लिए इस मुद्दे को काफी अहमियत दे रहा है,इसकी कटु आलोचना कर रहा है

केरल में मुस्लिम आबादी भयावह रूप से बढ़ रही है। इस असामान्य रूप से जनसंख्या विस्फोट ने हिंदुओं और ईसाइयों के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। इस साल केरल में मुस्लिम आबादी 35.6% दर्ज की गई है।

हाल ही में ईसाई सोशल मीडिया समूहों पर वायरल हुए एक वीडियो में एक युवती को उसके माता-पिता की सहमति के बिना अपने प्रेमी से शादी करते हुए दिखाया गया है और बाद में उसे पता चलता है कि उसका पति जालीदार टोपी पहना हुआ एक मुस्लिम है।

वीडियो में दिखाया गया है कि युवती का पति जबरदस्ती उसके माथे की बिंदी उतारता है, उसके सिर को एक दुपट्टे से ढक देता है। उसे कुरान देता है और बाद में अपनी पत्नी को इस्लामिक आतंकवादियों को बेच देता है।

केरल स्थित ईसाई संस्था क्रिश्चियन एसोसिएशन और अलायंस फॉर सोशल एक्शन (CASA) के सदस्यों ने फेसबुक पर वीडियो साझा करते हुए इसे “लव जिहाद का पर्दाफाश” कहा है।

मलयालम भाषा के इस वीडियो में कहा गया है, “सीपीआईएम का लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट और कांग्रेस का यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट – सभी जिहादियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं, पनाह दे रहे हैं। आतंकवादी खुलेआम ‘लव जिहाद’ को अंजाम दे रहे हैं। हम सभी को इसे रोकना चाहिए और उग्रवादियों को नेस्तनाबूद कर देना चाहिए , उन्हें जड़ से मिटा मिटा देना चाहिए।”

पिछले साल, सिरो-मालाबार चर्च(Syro-Malabar Church) ने एक बयान में चिंता व्यक्त की थी कि केरल में मुसलमान लव जिहाद का जहर फैला रहे हैं और वे (चर्च) इसे रोकना चाहते हैं।

एर्नाकुलम के कक्कानाड के निवासी कैनेडी करिंबिंकलयिल(Kennedy Karimbinkalayil) ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि केरल में गैर-मुस्लिम लड़कियां लव जिहाद का शिकार हो रही हैं।

कैनेडी ने कहा, “नेटफ्लिक्स पर, मैंने लंदन की तीन लड़कियों के जीवन पर आधारित खिलाफत(Caliphate) नामक एक नाटक देखा। ‘लव जिहाद’ एक भयानक वास्तविकता है और यह पूरी दुनिया में हो रहा है।”

वे सेव सिरो-मालाबार फोरम(Save Syro-Malabar Forum) के माध्यम से लोगों को इसकी (लव जिहाद) भयावहता के बारे में चेतावनी दे रहे हैं।
चर्च के संयोजक 56 वर्षीय कैनेडी हमेशा अपनी शर्ट की जेब में ‘लव जिहाद’ पर जानकारी- पूर्ण टिप्पणियों का पुलिंदा रखते हैं ताकि लोगों को, ख़ासकर लड़कियों को इसके खतरों के बारे में आगाह किया जा सके और लव जिहाद के खतरे के बारे में चेतावनी देने के लिए इन ‘तथ्यों और आंकड़ों’ को हर जगह वितरित भी करते हैं।

कोलकाता में गिरफ्तार किए गए 3 जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के आतंकवादियों का लक्ष्य बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ करना था। वे ख़ुद को ठाकुरपुकुर कैंसर अस्पताल में इलाज करा रहे एक मरीज का परिजन बताकर किराए के एक मकान में छिपे हुए थे।

बांग्लादेशी आतंकवादी समूह जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश की सक्रियता के साक्ष्य पश्चिम बंगाल में लगातार मिल रहे हैं, जिन पर राजनीतिक दलों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस्लामिक खिलाफत के लिए जमात की योजना का हिस्सा होने का आरोप लगाया है।
प्रतिबंधित आतंकवादी समूह के तीन आतंकवादियों को रविवार को गिरफ्तार किया गया।
खबर के मुताबिक तीनों करीबी रिश्तेदार बताकर ठाकुरपुर कैंसर अस्पताल में इलाज करा रहे मरीज से मिलने जाते थे । पुलिस के एक विश्वसनीय सूत्र के अनुसार, वे तोड़फोड़ करने के उद्देश्य से आगे बढ़ रहे थे।
अब सवाल यह है कि कोलकाता और पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी मुसलमानों के चिकित्सकीय ठिकाने कितने सुरक्षित हैं ?
पुलिस के एक जांच अधिकारी ने बताया कि उन्हें दोपहर करीब दो बजे ठाकुरपुकुर में एक किराए के मकान से गिरफ्तार किया गया और जेएमबी से संबंधित कागजात बरामद किए गए।
गिरफ्तार आतंकवादियों में नजीउर रहमान, शब्बीर और रबीउल शामिल हैं। पुलिस ने उनके पास से मोबाइल फोन, आग्नेयास्त्र, नकली भारतीय पहचान दस्तावेज और बांग्लादेशी पासपोर्ट, आतंकवादी समूह से संबंधित दस्तावेज और जिहादी साहित्य बरामद किया।
बरामद डायरी में बांग्लादेश के विभिन्न जेएमबी आतंकवादी नेताओं से संबंधित जानकारी भी है।

पश्चिम बंगाल निवासी जेएमबी आतंकवादी नज़ीर शेख़ त्रिपुरा में गिरफ़्तार

बीते 5 मार्च , मंगलवार को त्रिपुरा पुलिस ने अगरतला से नज़ीर शेख़ नामक जमात-उल-मुजाहिदीन, बांग्लादेश (जेएमबी) के एक संदिग्ध आतंकवादी को गिरफ़्तार किया ।  25 वर्षीय शेख़ नज़ीर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद का रहनेवाला है। वह अगरतला में राजमिस्त्री का काम करता था।
पत्रकार सम्मेलन में त्रिपुरा के डीजीपी एके शुक्ला ने कहा कि नज़ीर 2013 के बोधगया
विस्फोट से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ था। बोधगया विस्फोट के मुख्य आरोपी कौसर के सहयोगी के रूप में काम करता था नज़ीर। पुलिस के अनुसार 5 मार्च मंगलवार शाम को अनुसंधानकर्ताओं   और स्थानीय पुलिस के एक दल ने अगरतला के अरुंधति नगर से नज़ीर को गिरफ़्तार किया।
पुलिस को शक है कि आरोपी नज़ीर राजगीर के रूप में काम करने के साथ साथ जेएमबी के लिए भी काम करता था।

गंगासागर मेले में बाइबिल वितरण

गंगासागर मेले में पुण्यस्नान को आये श्रृद्धालुओं के बीच ईसाइयों के धर्मग्रंथ बाइबिल की प्रतियां बांटी गईं,जिसे लेकर किसी को कोई परवाह नहीं !

इवांजेलिकल चर्च आफ इंडिया (Evangelical Church of India) की ओर से गंगासागर मेले में मुफ़्त बाइबिल वितरण किया गया। गंगासागर मंदिर के निकट स्थित हेलिपैड के आसपास बाइबिल की प्रतियां बांटी गईं। हिंदू से ईसाइयत में धर्मांतरित बरुण प्रामाणिक और उनकी पत्नी सुलोचना प्रामाणिक को बाइबिल वितरित करते देखा गया।कई पेटियों में भर-भर कर बाइबिल की प्रतियां मंगाई गई थीं। हिंदी ( पवित्र ग्रंथ के नाम से) तथा बांग्ला (नतुन नियम नाम से)-दोनों ही भाषाओं में अनूदित बाइबिल की प्रतियां बांटी गईं ‌।
कुछ ग़ैर बंगाली तीर्थयात्रियों के विरोध जताने पर वे चुपचाप अपना सामान लपेट कर वहां से निकल भागे। पूछने पर उन्होंने बताया कि वे पिछले तीन सालों से गंगासागर मेले में बाइबिल वितरण कर रहे हैं।अब तक तीन लाख से अधिक प्रतियां बांट चुके हैं। उनके हिंदू नाम के बारे में पूछे जाने पर बताया कि ईसाइयत में धर्मांतरित हुए हैं, नाम परिवर्तन की कोई आवश्यकता नहीं है।
हिंदुओं का आक्रामक न होना ही विधर्मियों की ऐसी धृष्टता का कारण माना जा सकता है।

अलीपुरदुआर की ईसाई युवती अपर्णा की सनातन हिंदू धर्म में घर वापसी

shyam-anjaliअलीपुरदुआर के कोहिनूर चाय बागान की ईसाई युवती अपर्णा ओरांव ( नाम परिवर्तित ) ने ईसाइयत त्याग कर अपने पुर्वजों के सनातन धर्म में प्रत्यावर्तन किया। सालों पहले अपर्णा के परिवार की दरिद्रता का फायदा उठाते हुए ईसाइयत में धर्मांतरित किया गया था। उसके बाद से परिवार के सभी सदस्य ईसाइयत को ही अपना धर्म मानने लगे। इसी बीच (बीते कुछ सालों से) धैलाझरा चाय बागान के हिंदू युवक श्रीराम खड़िया के साथ अपर्णा का प्रेम संबंध स्थापित हो गया था। लेकिन जब श्याम ने अपर्णा से शादी करना चाहा तो चर्च की अगुवाई में ईसाइयों ने उसमें बाधा डाली। यहां तक कि श्याम  के परिवारवालों ने भी युवती के ईसाई होने पर  इस शादी में ऐतराज़ जताया।
ऐसे हालात में हिंदू संहति के स्थानीय कार्यकर्ता उनकी मदद हेतु आगे आए। उनकी देखरेख में ही स्थानीय शिवमन्दिर में अपर्णा की ‘घर वापसी’ कराई गई। उसके बाद उसी शिवमन्दिर में उन दोनों का विवाह  हिंदू रीति से संपन्न हुआ। श्याम खड़िया का परिवार भी खुशी खुशी नववधु को अपना लिया ‌ हिंदू संहति की ओर से आगे भी उक्त दम्पति का साथ देने का आश्वासन दिया गया।